लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के स्थानांतरण और समायोजन को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता अब खत्म होने वाली है। शासन ने एक बेहद पारदर्शी और डेटा-आधारित (Database-driven) नीति पेश की है, जिससे न केवल स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी, बल्कि शिक्षकों को भी अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा।
1. समायोजन का मुख्य आधार: 30 अप्रैल का डेटा
नए आदेश के अनुसार, अब समायोजन किसी पुराने रिकॉर्ड पर नहीं, बल्कि 30 अप्रैल 2026 की वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर होगा। शासन का मुख्य लक्ष्य RTE (शिक्षा का अधिकार) मानकों को कड़ाई से लागू करना है।
- न्यूनतम शिक्षक: हर स्कूल में कम से कम 2 शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य होगी।
- सत्यापन: छात्र संख्या का भौतिक सत्यापन स्कूल के इंचार्ज, प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) मिलकर करेंगे ताकि डेटा में कोई हेराफेरी न हो।
2. कौन होगा 'सरप्लस' और किसका होगा तबादला?
शिक्षकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसे हटाया जाएगा? शासन ने इसे स्पष्ट कर दिया है:
- सुपर सीनियर शिक्षक: यदि किसी स्कूल में छात्रों की संख्या कम है और शिक्षक ज्यादा हैं, तो वहां के सबसे वरिष्ठ (Super Senior) शिक्षक को सरप्लस मानकर दूसरे स्कूल में भेजा जाएगा।
- हेड मास्टर्स के लिए नियम: यदि छात्र संख्या 150 से कम है, तो हेड मास्टर्स को भी सरप्लस की श्रेणी में रखा जा सकता है।
3. महिला शिक्षकों के लिए राहत
सरकार ने महिला शिक्षकों की सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा है। आदेश में कहा गया है कि:
- महिला शिक्षिका का समायोजन प्राथमिकता के आधार पर उसी विकास खंड (Block) में किया जाएगा।
- यदि उसी ब्लॉक में जगह न हो, तो उन्हें बगल के ऐसे ब्लॉक में भेजा जाएगा जो सड़क संपर्क (Road Connectivity) से अच्छी तरह जुड़ा हो।
4. पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी
पिछली विसंगतियों को दूर करने के लिए इस बार प्रक्रिया को 'डेटाबेस' बनाया गया है:
- वेबसाइट पर लिस्ट: समायोजन की पूरी सूची जिले की एनआईसी (NIC) वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएगी।
- आपत्ति का मौका: यदि किसी शिक्षक को लगता है कि उनके साथ गलत हुआ है, तो वे 7 दिनों के भीतर जिला स्तरीय समिति के पास अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
5. समयसीमा: 22 मई की डेडलाइन
यह मामला माननीय उच्च न्यायालय में भी चल रहा है। कोर्ट में अगली सुनवाई 22 मई 2026 को होनी है। इसलिए, शासन ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि 20 मई तक समायोजन की पूरी रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी जाए।
निष्कर्ष
बेसिक शिक्षा विभाग का यह कदम स्कूलों में शिक्षकों के असंतुलन को खत्म करने की एक बड़ी कोशिश है। जहाँ एक तरफ 'शिक्षक विहीन' स्कूलों को नए अध्यापक मिलेंगे, वहीं दूसरी तरफ पारदर्शी व्यवस्था से कोर्ट-कचहरी के मामलों में भी कमी आने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण नोट: शिक्षक अपनी आपत्तियों के लिए अपने जिले के बीईओ (BEO) या बीएसए (BSA) कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं और निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑफलाइन आवेदन दे सकते हैं।


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