Type Here to Get Search Results !
ADVERTISEMENT

69,000 शिक्षक भर्ती: आरक्षित वर्ग के योग्य उम्मीदवारों को नौकरी देने पर विचार करेगी UP सरकार, सुप्रीम कोर्ट में दिया प्रस्ताव

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में सालों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा प्रस्ताव रखते हुए कहा है कि वह चयन सूची से बाहर रह गए उन आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने पर विचार करने के लिए तैयार है, जो तय मानकों को पूरा करते हैं।

UP 69000 Teacher Bharti Supreme Court Case Yogi Govt Proposal

​राज्य सरकार के इस कदम से 2018 से लटके इस विवाद में फंसे अभ्यर्थियों को एक नई उम्मीद मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस प्रस्ताव को रिकॉर्ड पर ले लिया है।

​6 हफ्तों में तैयार होगी प्रक्रिया, कोर्ट ने माँगी रिपोर्ट

​जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी और अंकित गोयल ने यह प्रस्ताव पेश किया।

  • प्रक्रिया के लिए समय: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को इस पूरी योजना और प्रक्रिया को तैयार करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया है।
  • अगली सुनवाई: इस मामले की स्थिति रिपोर्ट (Status Report) देखने के बाद, कोर्ट 8 सप्ताह बाद मामले की अगली सुनवाई करेगा।​
राज्य सरकार की शर्त: सरकार ने साफ किया है कि यह नियुक्तियाँ उम्मीदवारों की प्राथमिक शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करने और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर ही की जाएंगी। साथ ही, इसे भविष्य के किसी अन्य मामले में नजीर (उदाहरण) नहीं माना जाएगा।

क्या है पूरा मामला? (2018 से अब तक)

​यह विवाद साल 2018 में शुरू हुई 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा है। मामले ने तब नया मोड़ लिया जब इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 13 अगस्त 2024 को पूरी मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया था।

​हाई कोर्ट का आदेश:

​हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि आरक्षण के सभी नियमों का सही तरीके से पालन करते हुए 3 महीने के भीतर नई मूल चयन सूची तैयार की जाए।

​सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुँचा मामला?

  • सामान्य वर्ग की चिंता: हाई कोर्ट द्वारा लिस्ट रद्द किए जाने के बाद, पहले से नौकरी कर रहे सामान्य वर्ग के शिक्षकों के पदों पर खतरा मंडराने लगा। इसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
  • आरक्षित वर्ग की मांग: आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी कोर्ट में अर्जियां दाखिल कीं। उनका आरोप है कि भर्ती में आरक्षण नियमों का उल्लंघन हुआ है।

​'पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों को हटाने की मांग नहीं'

​मामले की सुनवाई के दौरान आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों का पक्ष रख रहे वकील मनीष गोस्वामी ने कोर्ट को बताया कि ये अभ्यर्थी साल 2020 से न्याय के लिए भटक रहे हैं और उनके साथ अन्याय हुआ है। हालांकि, उन्होंने मानवीय पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया:

​"हमारी मांग यह बिल्कुल नहीं है कि जो शिक्षक पिछले 5 सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें नौकरी से बाहर निकाला जाए। हम सिर्फ अपने हक और नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।"

​आगे क्या होगा?

​फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अन्य वकीलों की दलीलों को रोकते हुए कहा है कि पहले राज्य सरकार को अपनी प्रक्रिया और रूपरेखा तैयार करने दी जाए। अब सबकी नजरें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 6 हफ्तों के भीतर पेश की जाने वाली स्टेटस रिपोर्ट पर टिकी हैं।

Top Post Ad

ADVERTISEMENT

Bottom Post Ad

ADVERTISEMENT