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टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) का स्पष्ट संदेश, "लोकतंत्र में संसद सर्वोपरि है और न्याय की लड़ाई जारी रहेगी"

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश सहित देशभर के लाखों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित करने वाले टीईटी (TET) अनिवार्यता मुद्दे पर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 सितम्बर 2025 को दिए गए निर्णय के बाद हलचल तेज है। इस संवेदनशील विषय पर शिक्षक संघ (TFI) ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए साथियों को आश्वस्त किया है कि समस्या का अंतिम निराकरण लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संसद के माध्यम से ही संभव है।

TET Matter in Supreme Court Verdict

​संसद तक पहुँचाई गई आवाज

​टीएफआई का मानना है कि चूंकि कानून निर्माण की शक्ति संसद के पास है, इसलिए संगठन ने देश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंपकर अपनी बात मजबूती से रखी। इसका परिणाम यह रहा कि संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के अधिकांश सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया और शिक्षकों की समस्या के समाधान की मांग की।

  • जनपद स्तर पर प्रदर्शन: सभी जनपदों के मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन कर जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे गए।
  • दिल्ली की विशाल रैली: 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ऐतिहासिक रैली में लाखों शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में सांसद श्री जगदंबिका पाल जी ने शिक्षकों की मांगों को सरकार तक पहुँचाने का आश्वासन दिया।
  • उच्च स्तरीय वार्ता: माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान जी, उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, श्री पंकज चौधरी जी एवं केंद्रीय राज्यमंत्री श्री जितिन प्रसाद जी से मिलकर समस्या के स्थायी समाधान पर चर्चा की गई।

​कानूनी मोर्चे पर मजबूती से पैरवी

​सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती देने और कानूनी लड़ाई को मजबूती से लड़ने के लिए टीएफआई ने देश के दिग्गज अधिवक्ताओं को मैदान में उतारा है। ओपन कोर्ट में सुनवाई के दौरान:

  1. श्री पी.एस. पटवालिया जी ने अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ (महासचिव श्री राम मूर्ति ठाकुर) के रिव्यू पिटीशन में पक्ष रखा।
  2. श्री वी. गिरी जी ने उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से (श्री मेघराज सिंह एवं 232 अन्य) दाखिल रिव्यू में दलीलें दीं।

​कोर्ट की सुनवाई के मुख्य बिंदु

​सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि 23 अगस्त 2010 के आरटीई (RTE) एक्ट के लागू होने के समय पूर्व से नियुक्त शिक्षकों को टेट से छूट दी गई थी। हालांकि, न्यायालय का रुख 10 अगस्त 2017 के उस राजपत्र (संशोधन) की ओर अधिक झुका दिखा, जिसमें 31 मार्च 2015 तक नियुक्त सभी शिक्षकों के लिए टेट अनिवार्य कर दिया गया था।

​खेद का विषय रहा कि 10 राज्यों के अधिवक्ताओं की उपस्थिति के बावजूद किसी ने भी यह स्पष्ट नहीं किया कि पिछले 8 वर्षों में किसी भी राज्य सरकार ने शिक्षकों को इस संबंध में कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया था।

​आगामी रणनीति और अपील

​वर्तमान में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है, जिसके जल्द आने की संभावना है। संगठन ने सभी शिक्षक साथियों से अपील की है:

  • ​यदि निर्णय अनुकूल आता है, तो यह हमारे संघर्ष की जीत होगी।
  • ​यदि निर्णय प्रतिकूल रहता है, तो हतोत्साहित होने की आवश्यकता नहीं है।

हमारा अगला कदम: टीएफआई अपना आंदोलन जारी रखेगी और केंद्र सरकार से मांग करेगी कि 2017 के संशोधन के कारण देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ जो 'अन्याय' हुआ है, उसे वापस लेकर सुधार किया जाए। हम सरकार से करोड़ों परिजनों के हित में न्याय की गुहार लगाएंगे।

डॉ. दिनेश चन्द्र शर्मा
राष्ट्रीय अध्यक्ष, टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया