RTE मानक: परिषदीय विद्यालयों के लिए निर्धारित मानक और विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात | Pupil Teachers Ratio
भारत में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 'नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम' के तहत स्कूलों के लिए कुछ कड़े नियम और मानक तय किए गए हैं। इन मानकों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को एक सुरक्षित वातावरण और पर्याप्त शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना है।
शिक्षकों की संख्या का निर्धारण
अधिनियम के अनुसार, विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति छात्रों की संख्या के आधार पर की जाती है। इसे दो श्रेणियों में बांटा गया है:
(क) प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5 तक)
प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात को निम्नलिखित तालिका के अनुसार व्यवस्थित किया गया है:
प्राथमिक स्तर पर छात्रों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति इस प्रकार होगी:
- 60 बच्चों तक: कुल 2 शिक्षक।
- 61 से 90 बच्चों के बीच: कुल 3 शिक्षक।
- 91 से 120 बच्चों के बीच: कुल 4 शिक्षक।
- 121 से 200 बच्चों के बीच: कुल 5 शिक्षक।
- 150 से अधिक बच्चे होने पर: 5 शिक्षक और साथ में 1 पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक।
- 200 से अधिक बच्चे होने पर: छात्र और शिक्षक का अनुपात 40:1 से अधिक नहीं होगा (प्रधानाध्यापक को अलग रखकर)।
(ख) उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8 तक)
उच्च प्राथमिक स्तर पर विषय-विशेष की शिक्षा पर अधिक जोर दिया गया है:
-
विषयवार शिक्षक: प्रत्येक कक्षा के लिए कम से कम एक शिक्षक होगा, ताकि निम्नलिखित प्रत्येक विषय के लिए एक शिक्षक उपलब्ध हो:
- विज्ञान और गणित
- सामाजिक अध्ययन
- भाषा
- अनुपात: प्रत्येक 35 बच्चों पर कम से कम एक शिक्षक का होना अनिवार्य है।
- विशेष नियुक्तियाँ: जहाँ 100 से अधिक बच्चे हों, वहाँ एक पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक और कला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा, तथा कार्य शिक्षा के लिए अंशकालिक (Part-time) शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
विद्यालय भवन के लिए अनिवार्य मानक
एक आदर्श विद्यालय के लिए केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दस्तावेज़ के अनुसार, प्रत्येक विद्यालय में निम्नलिखित सुविधाएँ होनी चाहिए:
- कक्षाएँ: प्रत्येक शिक्षक के लिए कम से कम एक कक्षा और एक कार्यालय-सह-भंडार-सह-प्रधानाध्यापक कक्ष।
- बाधा मुक्त पहुँच: स्कूल भवन ऐसा होना चाहिए जहाँ दिव्यांग बच्चे भी आसानी से आ-जा सकें।
- स्वच्छता: लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था।
- पेयजल: सभी बच्चों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त पीने के पानी की सुविधा।
- रसोई: यदि विद्यालय में दोपहर का भोजन (Mid-day Meal) पकाया जाता है, तो एक अलग रसोई घर का होना अनिवार्य है।
- खेल का मैदान: बच्चों के शारीरिक विकास के लिए खेल के मैदान की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।




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