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शिक्षा विभाग में करोड़ों का गबन, चपरासी की दो पत्नियों सहित सात महिलाएं गिरफ्तार

Sir Ji Ki Pathshala

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में शिक्षा विभाग के भीतर हुए एक बड़े वित्तीय घोटाले ने शासन-प्रशासन की नींद उड़ा दी है। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय में तैनात एक चपरासी ने सरकारी धन की ऐसी लूट मचाई कि उसने अपनी पत्नियों और रिश्तेदारों को रातों-रात करोड़पति बना दिया। कोतवाली पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी इल्हाम उर रहमान शम्सी की दो पत्नियों सहित कुल सात महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। ये गिरफ्तारियां गाजियाबाद, बुलंदशहर, संभल और बिजनौर जैसे अलग-अलग जिलों से की गई हैं।

Scam in education department

​इस पूरे घोटाले की पटकथा चपरासी इल्हाम उर रहमान शम्सी ने बड़ी चतुराई से लिखी थी। कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने के बावजूद वह वेतन बिल और टोकन जनरेशन जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहा था। पद का दुरुपयोग करते हुए उसने ट्रेजरी सिस्टम में सेंध लगाई और फर्जी बेनिफिशियरी आईडी तैयार कर सरकारी धन को सीधे अपने करीबियों के खातों में डालना शुरू कर दिया। इस धोखाधड़ी की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने अब तक 53 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की है, जिनमें करीब 5,50,54,594 रुपये की भारी-भरकम राशि को फ्रीज कराया जा चुका है।

​एएसपी विक्रम दहिया के अनुसार, इस घोटाले की जांच में चौकाने वाले वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं। मुख्य आरोपी ने सरकारी खजाने से अपनी पहली पत्नी लुबना के खाते में 2.37 करोड़ रुपये और दूसरी पत्नी अजारा खान के खाते में 2.12 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इतना ही नहीं, उसने अपनी साली फातिमा नवी को 1.03 करोड़, सास नाहिद को 95 लाख, सलहैज आफिया खान को 80 लाख से अधिक और अपनी परिचित महिलाओं परवीन खातून व आशकारा परवीन को क्रमशः 48 लाख और 38 लाख रुपये भेजकर उपकृत किया।

​पुलिस की गिरफ्त में आई महिलाओं में संभल की लुबना और फातिमा, बिजनौर की परवीन खातून, गाजियाबाद की आशकारा परवीन और बुलंदशहर के खुर्जा की रहने वाली अजरा खान, नाहिद व आफिया खान शामिल हैं। मामले की शुरुआत 13 फरवरी 2026 को हुई थी, जब डीआईओएस राजीव कुमार ने कोतवाली में इस गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वर्तमान में पुलिस इस जांच में जुटी है कि आखिर एक मामूली चपरासी के पास ट्रेजरी के लॉगिन और पासवर्ड कैसे पहुंचे और क्या इस खेल में विभाग के अन्य जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी भी पर्दे के पीछे से सहयोग कर रहे थे।