प्राथमिक के प्रधानाध्यापक अब जूनियर के सहायक अध्यापक! देखें पुराना आदेश
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित संविलियन विद्यालयों (Merged Schools) में प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए पदनामों को लेकर विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। विशेष रूप से, संविलियन के बाद प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की स्थिति को लेकर जारी निर्देशों ने एक नई व्यवस्था को जन्म दिया है।
संविलियन व्यवस्था का मुख्य आधार
जब एक ही परिसर में स्थित प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 1-5) और उच्च प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 6-8) का संविलियन किया जाता है, तो वह एक ही इकाई बन जाता है। शासन के नियमों के अनुसार, ऐसे संयुक्त विद्यालय का प्रशासनिक प्रमुख उच्च प्राथमिक विद्यालय का प्रधानाध्यापक होता है।
पद नाम अंकित करने संबंधी निर्देश (Point 8 का संदर्भ)
हालिया आदेशों और मानव संपदा पोर्टल पर डेटा अपडेट करने के निर्देशों के बिंदु संख्या 8 में यह स्पष्ट किया गया है कि:
- वरिष्ठता और नेतृत्व: संविलियन विद्यालय में यदि उच्च प्राथमिक विद्यालय का प्रधानाध्यापक कार्यरत है, तो वही पूरे विद्यालय का कार्यभार संभालेगा।
- प्राथमिक के प्रधानाध्यापक की स्थिति: संविलियन के फलस्वरूप, पूर्व में कार्यरत प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को उस संयुक्त इकाई में उच्च प्राथमिक विद्यालय (जूनियर) के सहायक अध्यापक के समकक्ष माना जाता है और पोर्टल पर उनका पदनाम इसी अनुसार अंकित किया जाना अनिवार्य है।
- वेतन और अधिकार: पदनाम अंकित करने की इस प्रक्रिया से शिक्षक के वेतन या ग्रेड-पे पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि प्राथमिक का प्रधानाध्यापक और जूनियर का सहायक अध्यापक समान ग्रेड-पे (4600/4800) पर होते हैं। यह केवल प्रशासनिक सुगमता और पोर्टल पर 'सीनियर मोस्ट' शिक्षक की पहचान के लिए किया जाता है।



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