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नौकरी बदलने पर नए नियोक्ता को 'Form-122' देना क्यों है जरूरी? जानें Tax Saving का नया नियम

Sir Ji Ki Pathshala

यदि आपने मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान अपनी नौकरी बदली है, तो आयकर विभाग का एक नया बदलाव आपके लिए जानना बेहद आवश्यक है। विभाग ने वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए 'फॉर्म 122' की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य नौकरी बदलने की स्थिति में होने वाली टैक्स संबंधी विसंगतियों और गलतियों को रोकना है। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, इस फॉर्म को न भरने पर आपके वेतन से उम्मीद से अधिक टैक्स (TDS) कट सकता है, जिससे न केवल आपकी 'इन-हैंड' सैलरी कम होगी, बल्कि रिफंड पाने के लिए आपको महीनों इंतजार भी करना पड़ सकता है।

Income-Tax-Form-122-Guidelines

नौकरी बदलने पर होने वाली 4 बड़ी गलतियां

  1. छूट का दोहरा लाभ: स्टैंडर्ड डिडक्शन (50,000 रुपये) का लाभ साल में एक ही बार मिलता है। जानकारी के अभाव में पुरानी और नई दोनों कंपनियां यह छूट दे देती हैं, जिससे बाद में टैक्स देनदारी बढ़ जाती है।
  2. टैक्स स्लैब का गलत आकलन: नई कंपनी अक्सर आपको 'नया कर्मचारी' मानकर शुरुआती कर-मुक्त सीमा का लाभ दे देती है, जबकि आप वह लाभ पिछली कंपनी में पहले ही ले चुके होते हैं।
  3. पुराने फॉर्म-16 की अनदेखी: पिछली कंपनी से फॉर्म-16 या वेतन प्रमाण पत्र न लेना एक बड़ी भूल है, क्योंकि इसके बिना फॉर्म 122 में सही डेटा भरना संभव नहीं है।
  4. निवेश घोषणा में देरी: धारा 80C या अन्य निवेशों की जानकारी समय पर न देने से नया नियोक्ता अधिक टीडीएस काटने लगता है।

फॉर्म 122 भरने के मुख्य लाभ

  • सटीक टैक्स कटौती: पूरे साल की कुल आय के आधार पर सही टैक्स काटा जाता है।
  • रिफंड का झंझट खत्म: जरूरत से ज्यादा टैक्स नहीं कटता, जिससे रिफंड के लिए आवेदन की जरूरत कम पड़ती है।
  • बेहतर टैक्स प्लानिंग: कर्मचारी पहले से जान पाता है कि उसे साल के अंत तक कितना कर चुकाना है।
  • अन्य आय का समायोजन: ब्याज, किराया या अन्य आय पर कटे टीडीएस का लाभ मिल जाता है।
  • होम लोन का फायदा: इसके जरिए आप 'हाउस प्रॉपर्टी लॉस' (होम लोन ब्याज) की जानकारी दे सकते हैं, जिससे टैक्स देनदारी कम हो जाती है।

किसे भरना होगा यह फॉर्म?

  • ​जिन्होंने वित्त वर्ष के बीच में नौकरी बदली हो।
  • ​जिनकी एक से अधिक नौकरी रही हो।
  • ​जिनकी बैंक ब्याज, किराया या अन्य स्रोतों से आय हो।
  • ​जो होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट चाहते हों।
  • ​जिनका पहले ही कहीं टीडीएस (TDS) या टीसीएस (TCS) कट चुका हो।

फॉर्म 122 क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

​पहले कर्मचारियों को फॉर्म 12B और 12BAA के जरिए पुराने नियोक्ता की आय की जानकारी देनी पड़ती थी, जो अक्सर अधूरी रह जाती थी। फॉर्म 122 एक 'संयुक्त घोषणा पत्र' है। इसके माध्यम से आप अपनी पुरानी आय, कटा हुआ टैक्स, होम लोन का नुकसान और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी एक ही जगह नए नियोक्ता को दे सकते हैं।

महत्वपूर्ण: यह फॉर्म कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, लेकिन एडवांस टैक्स पर लगने वाले जुर्माने (धारा 234B और 234C के तहत ब्याज) से बचने के लिए इसे भरना बेहद हितकारी है।

जमा करने की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज

जरूरी दस्तावेज:

  • ​पुरानी कंपनी की सैलरी स्लिप और फॉर्म-16।
  • ​टीडीएस (TDS) विवरण।
  • ​होम लोन और बैंक ब्याज प्रमाण पत्र।
  • ​पैन और आधार की जानकारी।

जमा करने के तरीके:

  1. HR विभाग: फॉर्म भरकर सीधे कंपनी के एचआर या पेरोल विभाग को दें।
  2. ऑनलाइन पोर्टल: यदि कंपनी का अपना पोर्टल है, तो वहां डिजिटल रूप से अपलोड करें।
  3. ईमेल: कंपनी की नीति के अनुसार स्कैन कॉपी ईमेल कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • क्या इसे आयकर पोर्टल पर अपलोड करना है? नहीं, यह केवल आपके नियोक्ता (Employer) के लिए है।
  • क्या गृह ऋण का लाभ मिलेगा? हाँ, इसमें होम लोन ब्याज का विवरण दिया जा सकता है।
  • अगर फॉर्म-16 न मिले तो? आप अपनी सैलरी स्लिप और फॉर्म 26AS की मदद से जानकारी भर सकते हैं।
  • क्या इससे इन-हैंड सैलरी बढ़ेगी? हाँ, सही टैक्स आकलन से फालतू टीडीएस नहीं कटेगा और मासिक वेतन बढ़ सकता है।
  • गलत जानकारी देने पर क्या होगा? आयकर विभाग नोटिस जारी कर सकता है और आपको अतिरिक्त टैक्स के साथ जुर्माना भी देना पड़ सकता है।

निष्कर्ष: जैसे ही आप नई नौकरी जॉइन करें, तुरंत 'फॉर्म 122' भरकर जमा करें। यह आपको भविष्य की टैक्स संबंधी उलझनों और रिफंड के लंबे इंतजार से बचाएगा।