नई दिल्ली: दिल्ली शिक्षा निदेशालय (DoE) ने राजधानी के सरकारी स्कूलों के लिए गर्मी की छुट्टियों के कैलेंडर की घोषणा कर दी है। जारी किए गए आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, इस साल 11 मई से 30 जून तक स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। हालांकि, छुट्टियों के बावजूद कुछ कक्षाओं के लिए स्कूल पूरी तरह बंद नहीं होंगे। छात्रों के शैक्षणिक स्तर को सुधारने के लिए निदेशालय ने विशेष कक्षाओं का आयोजन करने का निर्णय लिया है।
नौवीं से बारहवीं के लिए चलेंगी 'स्पेशल क्लास'
शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 9वीं, 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए 'रेमेडियल' यानी उपचारात्मक कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इन कक्षाओं का मुख्य उद्देश्य उन छात्रों की मदद करना है जो कुछ विषयों में कमजोर हैं या जिन्हें पिछली परीक्षाओं के आधार पर अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है।
कक्षाओं का समय और महत्वपूर्ण तारीखें
विशेष कक्षाओं का आयोजन सीमित समय के लिए किया जाएगा ताकि छात्रों को छुट्टियों का आनंद लेने का भी मौका मिल सके:
- अवधि: 11 मई से शुरू होकर 23 मई तक।
- समय: सुबह 7:30 बजे से 10:30 बजे तक।
- शिक्षकों की उपस्थिति: शिक्षकों को सुबह 7:20 बजे तक स्कूल पहुंचना होगा और वे 11:00 बजे तक ड्यूटी पर रहेंगे।
- क्लास का स्वरूप: हर दिन 1-1 घंटे के कुल तीन पीरियड लगाए जाएंगे।
गणित और विज्ञान पर रहेगा विशेष फोकस
निदेशालय के निर्देशानुसार, कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए विज्ञान और गणित जैसे कठिन माने जाने वाले विषयों पर विशेष जोर दिया जाएगा। वहीं, 12वीं कक्षा के लिए विषयों का चयन छात्रों की शैक्षणिक जरूरतों और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। स्कूल के प्रधानाचार्यों को यह छूट दी गई है कि वे जरूरत पड़ने पर अन्य विषयों की कक्षाएं भी जोड़ सकते हैं।
छात्रों के लिए जरूरी नियम
- यूनिफॉर्म अनिवार्य: स्कूल आने वाले छात्रों के लिए प्रॉपर स्कूल यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य होगा।
- अभिभावकों की सहमति: इन कक्षाओं में शामिल होने के लिए छात्रों को अपने माता-पिता या अभिभावकों से लिखित सहमति लेनी होगी।
- सुविधाएं: भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पीने के ठंडे पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं का पुख्ता इंतजाम रखें।
निरीक्षण और निगरानी
इस पूरे कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा निदेशालय ने निगरानी के सख्त निर्देश दिए हैं। उप शिक्षा निदेशकों (DDE) को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे प्रतिदिन कम से कम दो स्कूलों का औचक निरीक्षण करें। इसके अलावा, स्कूल की लाइब्रेरी भी खुली रहेंगी ताकि छात्र वहां बैठकर सेल्फ-स्टडी कर सकें। आवश्यकता पड़ने पर अतिथि (Guest) और संविदा शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएंगी।
निष्कर्ष: दिल्ली सरकार का यह कदम विशेष रूप से उन छात्रों के लिए मददगार साबित होगा जो बोर्ड परीक्षाओं की दहलीज पर हैं, ताकि छुट्टियों के दौरान भी उनकी पढ़ाई का क्रम न टूटे।


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