भारत सरकार द्वारा गठित होने वाले 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में भारी उत्साह और उम्मीदें देखी जा रही हैं। जैसे-जैसे 2026 की समयसीमा करीब आ रही है, विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर लामबंदी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में, रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने एक व्यापक मांग पत्र तैयार किया है। इस मांग पत्र में न केवल वेतन वृद्धि, बल्कि जोखिम भरे कार्यों के लिए विशेष भत्ते और पदोन्नति के नियमों में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है।
न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव: ₹18,000 से ₹69,000 तक का सफर
AIDEF की सबसे प्रमुख मांगों में से एक न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Basic Pay) में क्रांतिकारी बदलाव लाना है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर लेवल-1 के कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन ₹18,000 है। फेडरेशन का तर्क है कि पिछले एक दशक में मुद्रास्फीति और जीवन निर्वाह की लागत में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जिसके कारण वर्तमान वेतन अपर्याप्त है।
- ₹69,000 की मांग: संगठन ने प्रस्ताव दिया है कि एंट्री लेवल पर सबसे कम वेतन पाने वाले कर्मचारी का मूल वेतन कम से कम ₹69,000 होना चाहिए।
- फिटमेंट फैक्टर पर जोर: कर्मचारियों की सैलरी कैलकुलेशन के लिए 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की गई है। यदि इसे स्वीकार किया जाता है, तो सभी स्तरों के कर्मचारियों के वेतन में एक समान और सम्मानजनक वृद्धि सुनिश्चित की जा सकेगी।
रिस्क अलाउंस (जोखिम भत्ता): जान जोखिम में डालने वालों के लिए विशेष सुरक्षा
रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मचारी अक्सर ऐसी परिस्थितियों में काम करते हैं जो सैन्य कर्मियों जितनी ही चुनौतीपूर्ण होती हैं। आयुध निर्माणियों (Ordnance Factories), नौसेना डॉकयार्ड और अन्य संवेदनशील इकाइयों में कर्मचारी रसायनों, विस्फोटकों और अत्यधिक तापमान के बीच ड्यूटी निभाते हैं।
1. अत्यधिक खतरनाक कार्यों के लिए ₹15,000 मासिक
AIDEF ने मांग की है कि जो कर्मचारी गोला-बारूद निर्माण, खतरनाक रासायनिक मिश्रण या अत्यधिक तापमान वाली भट्टियों (Furnaces) के पास काम करते हैं, उन्हें ₹15,000 प्रति माह का रिस्क अलाउंस दिया जाए। वर्तमान में यह भत्ता बेहद मामूली है, जो कर्मचारियों के स्वास्थ्य जोखिमों के साथ न्याय नहीं करता।
2. सामान्य जोखिम वाले कार्यों के लिए ₹10,000 मासिक
उन कर्मचारियों के लिए जो लगातार ऐसे वातावरण में रहते हैं जहाँ स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है, फेडरेशन ने ₹10,000 मासिक भत्ते का प्रस्ताव रखा है। यह मांग उन तकनीशियनों और सहायक कर्मचारियों के लिए है जो अग्रिम ठिकानों या कार्यशालाओं में निरंतर कार्य करते हैं।
DRDO कर्मचारियों के लिए विशेष सिफारिशें
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भारत की रक्षा तकनीक की रीढ़ है। यहाँ कार्यरत तकनीकी और वैज्ञानिक कर्मचारियों के लिए AIDEF ने कुछ विशेष बिंदु उठाए हैं:
- तकनीकी कैडर का पुनर्गठन: संगठन का कहना है कि DRDO के तकनीकी कर्मचारियों का करियर ग्राफ अक्सर एक बिंदु पर आकर थम जाता है। इसके लिए कैडर स्ट्रक्चर को फिर से डिजाइन करने की आवश्यकता है।
- पदोन्नति (Promotion) की अवधि में कमी: वर्तमान में एक स्तर से दूसरे स्तर पर पदोन्नत होने के लिए जो 'रेजिडेंसी पीरियड' (न्यूनतम सेवा अवधि) तय है, उसे कम करने की मांग की गई है ताकि युवा प्रतिभाओं को समय पर प्रोत्साहन मिल सके।
- समान कार्य, समान वेतन: DRDO के कर्मचारियों के वेतन की तुलना अन्य वैज्ञानिक संस्थाओं (जैसे ISRO या BARC) से करते हुए विसंगतियों को दूर करने का आग्रह किया गया है।
पे-लेवल का विलय और शैक्षणिक योग्यता का सम्मान
AIDEF ने वेतन आयोग के सामने यह तर्क भी रखा है कि कई विभागों में निचले स्तर के पे-लेवल (Pay Levels) बहुत अधिक हैं, जिससे प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ती हैं और कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान होता है।
- पदों का विलय: संगठन ने मांग की है कि कम अंतर वाले पे-ग्रेड्स को आपस में मिला दिया जाए, जिससे कर्मचारियों का शुरुआती वेतन स्तर ऊंचा हो सके।
- एंट्री पे-लेवल में सुधार: वर्तमान में कई तकनीकी पदों के लिए उच्च शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य है, लेकिन उनका शुरुआती वेतन स्तर (Entry Pay) उस योग्यता के अनुरूप नहीं है। फेडरेशन का सुझाव है कि भर्ती के समय ही योग्यता के आधार पर बेहतर पे-स्केल दिया जाना चाहिए।
कैडर रिव्यू और संगठित सेवा का दर्जा
रक्षा विभाग के कई ऐसे विंग हैं जो वर्षों से अपनी पहचान और स्पष्ट पदोन्नति नीति के लिए संघर्ष कर रहे हैं। AIDEF ने प्रस्ताव दिया है कि कुछ विशिष्ट विभागों को 'ऑर्गेनाइज्ड कैडर' (Organized Cadre) का दर्जा दिया जाए। इससे न केवल कर्मचारियों को समयबद्ध पदोन्नति मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यक्षमता में भी सुधार होगा।
कर्मचारी संगठनों का तर्क: क्यों जरूरी है यह बदलाव?
संघ का मानना है कि रक्षा उत्पादन और अनुसंधान में सिविल कर्मचारियों की भूमिका अपरिहार्य है। आत्मनिर्भर भारत और 'मेक इन इंडिया' जैसी योजनाओं की सफलता इन्ही कर्मचारियों के पसीने पर टिकी है।
"जब कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर देश की सुरक्षा के लिए उपकरण और हथियार तैयार करता है, तो सरकार का यह नैतिक दायित्व है कि वह उसे वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक सम्मान प्रदान करे।" - AIDEF का आधिकारिक रुख
निष्कर्ष: सरकार के सामने बड़ी चुनौती
8वें वेतन आयोग के सामने इन मांगों को रखना केवल वित्तीय वृद्धि का सवाल नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार के प्रति कर्मचारियों के विश्वास का मामला भी है। ³₹69,000 का न्यूनतम वेतन और ₹15,000 का रिस्क अलाउंस जैसे प्रस्ताव निश्चित रूप से सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ डालेंगे, लेकिन रक्षा कर्मचारियों का तर्क है कि उनकी सेवाओं की तुलना बाजार की दरों या सामान्य कार्यालयी कार्यों से नहीं की जा सकती।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग के गठन के साथ ही इन मांगों पर कितनी संवेदनशीलता से विचार करती है। आने वाले महीनों में कर्मचारी आंदोलनों और बातचीत का दौर और तेज होने की संभावना है।
मुख्य बिंदु एक नजर में:
- न्यूनतम वेतन: ₹18,000 से बढ़ाकर ₹69,000 करने की मांग।
- रिस्क अलाउंस: अधिकतम ₹15,000 मासिक का प्रस्ताव।
- फिटमेंट फैक्टर: 3.83 गुना बढ़ाने की सिफारिश।
- पदोन्नति: रेजिडेंसी अवधि कम करने और कैडर पुनर्गठन पर जोर।


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