नई दिल्ली: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुँचती दिख रही है। दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय (28, 29 और 30 अप्रैल) महत्वपूर्ण बैठक में देश के प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों का खाका आयोग के सामने पेश किया। इस बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) द्वारा दी गई प्रस्तुति की रही, जिसने न केवल वेतन वृद्धि बल्कि सामाजिक सुरक्षा और कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life Balance) को लेकर भी कड़े सुझाव दिए हैं।
वेतन संरचना में ऐतिहासिक बदलाव की मांग
AINPSEF के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन 'जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी' (NC-JCM) द्वारा सुझाए गए फिटमेंट फैक्टर का पूर्ण समर्थन करता है। यदि आयोग इन मांगों को स्वीकार करता है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि देखी जा सकती है।
- न्यूनतम वेतन में भारी उछाल: वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 है। संगठनों ने इसे बढ़ाकर ₹69,000 करने का प्रस्ताव दिया है। यह लगभग 283% की सीधी बढ़ोतरी है।
- फिटमेंट फैक्टर: वेतन निर्धारण के लिए 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है।
- इंक्रीमेंट की रफ्तार: वर्तमान में वार्षिक वेतन वृद्धि 3% की दर से होती है, जिसे बढ़ाकर 6% करने का सुझाव दिया गया है ताकि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनी रहे।
पुरानी पेंशन (OPS) और सामाजिक सुरक्षा
AINPSEF का गठन मुख्य रूप से नई पेंशन योजना (NPS) के विरोध और पुरानी पेंशन की बहाली के उद्देश्य से हुआ है। आयोग के समक्ष संगठन ने तर्क दिया कि 2003 के बाद सेवा में शामिल हुए कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को वापस लाना अनिवार्य है। इसके साथ ही, कर्मचारियों के अंशदान पर GPF (सामान्य भविष्य निधि) की सुविधा देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई, ताकि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के पास एक सम्मानजनक कोष हो।
शिक्षकों के लिए 65 वर्ष की रिटायरमेंट आयु
शिक्षा जगत से जुड़े कर्मचारियों के लिए AINPSEF ने एक क्रांतिकारी मांग रखी है। संगठन का कहना है कि स्कूल शिक्षकों के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त किया जाना चाहिए। जिस तरह यूजीसी (UGC) के तहत आने वाले प्रोफेसरों और मेडिकल प्रैक्टिशनर्स की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है, वही मानक स्कूल शिक्षकों पर भी लागू होना चाहिए। इसके पीछे तर्क यह है कि अनुभवी शिक्षकों की कमी को पूरा करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह कदम जरूरी है।
छुट्टियों का नया फॉर्मूला और फैमिली यूनिट्स
कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक दायित्वों को ध्यान में रखते हुए छुट्टियों के कैलेंडर में बदलाव का सुझाव दिया गया है। संगठन ने मांग की है कि सभी विभागों में समानता लाते हुए साल भर में कुल 64 छुट्टियों का प्रावधान हो, जिसमें:
- 14 आकस्मिक अवकाश (CL)
- 20 मेडिकल अवकाश
- 30 अर्जित अवकाश (EL)
इसके अलावा, वेतन निर्धारण के लिए उपयोग की जाने वाली 'फैमिली यूनिट्स' (परिवार के सदस्यों की संख्या जिनके आधार पर खर्च का आकलन होता है) को भी संशोधित करने की बात कही गई है, ताकि मध्यमवर्गीय परिवारों की वास्तविक जरूरतों को वेतन में जगह मिल सके।
केंद्र शासित प्रदेशों और स्वायत्त निकायों का मुद्दा
अक्सर देखा जाता है कि केंद्र सरकार के आदेशों को केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) और स्वायत्त निकायों (CABs) में लागू होने में लंबा समय लगता है। डॉ. पटेल ने मांग की है कि केंद्र सरकार के किसी भी नोटिफिकेशन या मेमोरेंडम को इन विभागों पर स्वतः लागू करने की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही, इन विभागों के बीच इंटर-ट्रांसफर सुविधा और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए CGHS (स्वास्थ्य योजना) का विकल्प देने पर भी जोर दिया गया है।
निष्कर्ष
8वें वेतन आयोग की चेयरपर्सन न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और सदस्य सचिव पंकज जैन के सामने रखी गई ये मांगें केंद्रीय कर्मचारियों की अगली एक दशक की रूपरेखा तय करेंगी। यदि इन मांगों पर सहमति बनती है, तो न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि सरकारी सेवाओं की कार्यकुशलता में भी सुधार की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल, गेंद अब आयोग और केंद्र सरकार के पाले में है।


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