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69,000 शिक्षक भर्ती: न्याय के लिए तपती सड़क पर रेंगे अभ्यर्थी, शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद शांत हुआ प्रदर्शन

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की चर्चित 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का सब्र अब जवाब दे रहा है। पिछले छह वर्षों से न्याय की गुहार लगा रहे अभ्यर्थियों ने सोमवार को भीषण गर्मी के बीच विरोध का एक बेहद दर्दनाक तरीका अपनाया। पूर्वाह्न करीब 11 बजे, चिलचिलाती धूप और तपती सड़क पर लेट-लेटकर (दंडवत होकर) अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास तक पहुंचे।

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​लगभग 20 मिनट तक सड़क की भीषण तपिश को झेलते हुए अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पसीने से तर-बतर और बेहाल हो चुके प्रदर्शनकारियों की स्थिति को देखते हुए मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें पानी पिलाया।

​शिक्षा मंत्री से वार्ता और आश्वासन

​प्रदर्शन की उग्रता और संवेदनशीलता को देखते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने तुरंत अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए भीतर बुलाया। अभ्यर्थियों ने मंत्री को ज्ञापन सौंपकर सुप्रीम कोर्ट में आगामी सुनवाई को लेकर चर्चा की।

अभ्यर्थियों की मांग: "प्रदेश सरकार कोर्ट में 'याची लाभ' (Petitioner Benefit) देने का प्रस्ताव पेश करे, ताकि पिछले छह साल से अधर में लटके इस मामले का त्वरित निस्तारण हो सके।"

​शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने अभ्यर्थियों के इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताई और उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद पुलिस ने अभ्यर्थियों को बसों में बैठाकर इको गार्डन (धरना स्थल) भिजवाया।

​आंकड़ों में दर्द: अब तक 60 से अधिक बार घेराव और प्रदर्शन

​पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर हर दरवाजा खटखटा चुके हैं। आंदोलन के प्रमुख आंकड़ों की सूची इस प्रकार है:

  • मुख्यमंत्री आवास का घेराव: 06 बार किया गया।
  • डिप्टी सीएम आवास का घेराव व प्रदर्शन: 10 बार किया गया।
  • पूर्व शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के आवास का घेराव: 08 बार हुआ।
  • कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के आवास पर प्रदर्शन: 07 बार हुआ।
  • केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल के आवास पर प्रदर्शन: 07 बार किया गया।
  • कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के आवास का घेराव: 03 बार हुआ।
  • शीर्ष नेतृत्व को पत्र: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को 20 से अधिक पत्र भेजे जा चुके हैं।

​इसके अलावा वर्ष 2025 में अभ्यर्थी गोरखपुर के जनता दरबार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात कर चुके हैं। साथ ही विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को 4 बार ज्ञापन सौंपा जा चुका है।

​क्या है पूरा मामला और क्यों अटका है पेंच?

​प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रामविलास, सुमित यादव, धनंजय गुप्ता, अमित और विक्रम ने भर्ती की पूरी टाइमलाइन साझा की:

  • 4 दिसंबर 2018: 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए।
  • 6 जनवरी 2019: लिखित परीक्षा आयोजित हुई।
  • 1 जून 2020: भर्ती का परिणाम घोषित किया गया।
  • विवाद की शुरुआत: आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने 19,000 सीटों पर आरक्षण की अनियमितता का आरोप लगाते हुए कोर्ट का रुख किया।
  • 13 अगस्त 2024: लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने भर्ती में प्रक्रियागत गड़बड़ी मानते हुए चयनितों की पूरी सूची को रद्द कर दिया।

​सरकार की उदासीनता पर उठाए सवाल

​पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश media प्रभारी राजेश चौधरी ने सरकार की पैरवी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया:

​"यह मामला पिछले 24 महीनों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अब तक यह मामला 31 बार सूचीबद्ध (Listed) हो चुका है, लेकिन दुखद यह है कि किसी भी तारीख पर सरकार अपना मजबूत पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुई। अब मंगलवार और बुधवार को फिर से इस मामले की सुनवाई होनी है, और हमें उम्मीद है कि सरकार इस बार हमें न्याय दिलाएगी।"

​छह साल से मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेल रहे इन अभ्यर्थियों का भविष्य अब पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के रुख और सरकार के हलफनामे पर टिका हुआ है।