प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में जुलाई माह में प्रस्तावित शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद मुख्य रूप से उन सेवारत शिक्षकों के 'अर्हता अंकों' (Qualifying Marks) को लेकर है, जो 2011 से पहले नियुक्त हुए थे और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार टीईटी पास करने की जद्दोजहद में हैं। आरक्षित वर्ग के शिक्षकों का तर्क है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर उन्हें भी अंकों में अधिक रियायत मिलनी चाहिए।
विवाद की जड़: सुप्रीम कोर्ट का आदेश और पुरानी नियुक्तियां
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया था, जिसके तहत देशभर में 2011 से पहले नियुक्त कक्षा 1 से 8 तक के सभी सरकारी शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 2 से 4 जुलाई 2026 तक परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है।
अन्य राज्यों का हवाला: 20% तक की छूट
शिक्षकों के विरोध का मुख्य आधार तमिलनाडु और राजस्थान जैसे राज्यों द्वारा दी गई छूट है।
- तमिलनाडु: सरकार ने सेवारत आरक्षित वर्ग (SC, ST, OBC) के शिक्षकों को अर्हता अंकों में 10 से 20 प्रतिशत तक की भारी छूट प्रदान की है।
- राजस्थान: यहाँ भी सेवारत आरक्षित शिक्षकों के लिए इसी प्रकार की बड़ी रियायत दी गई है।
यूपी-टीईटी 2026 और शिक्षकों का तर्क
उत्तर प्रदेश के शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव को भेजे प्रत्यावेदन में वर्तमान विज्ञापन को 'भेदभावपूर्ण' बताया है। उनकी प्रमुख दलीलें निम्नलिखित हैं:
- एनसीटीई की गाइडलाइन: शिक्षकों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 11 फरवरी 2011 की गाइडलाइन में स्पष्ट उल्लेख है कि राज्य सरकारें आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अर्हक अंकों में उचित रियायत दे सकती हैं।
- वर्तमान स्थिति: यूपी-टीईटी 2026 के वर्तमान नियमों के अनुसार, कार्यरत आरक्षित वर्ग के शिक्षकों को केवल 5 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। शिक्षकों की मांग है कि इसे अन्य राज्यों की तरह 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए।
- अनुभव का सम्मान: शिक्षकों का तर्क है कि वे दशकों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, ऐसे में उनकी वरिष्ठता और अनुभव को देखते हुए अर्हता अंकों में विशेष छूट दी जानी चाहिए।
भविष्य की राह: क्या होगा संशोधन?
शिक्षकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके प्रत्यावेदन पर विचार करते हुए विज्ञापन में संशोधन नहीं किया गया, तो वे इस मामले को लेकर कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।
"जब एनसीटीई और अन्य राज्य सरकारों ने शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए छूट का दायरा बढ़ाया है, तो उत्तर प्रदेश में केवल 5 प्रतिशत की रियायत शिक्षकों के साथ अन्याय है। हम केवल नियमों के तहत समान अवसर की मांग कर रहे हैं।" - शिक्षक प्रतिनिधि मंडल
अब सबकी निगाहें उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग पर टिकी हैं कि क्या आयोग परीक्षा से पहले विज्ञापन में बदलाव कर हजारों शिक्षकों को राहत देगा या यह मामला फिर से कोर्ट की दहलीज तक पहुंचेगा।


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