उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में इन दिनों उत्सव और नामांकन के माहौल से ज्यादा तनाव और किताबों का शोर है। सुप्रीम कोर्ट के एक कड़े आदेश ने उन हजारों शिक्षकों की रातों की नींद उड़ा दी है, जो पिछले कई दशकों से बिना टीईटी (TET) पास किए सेवाएं दे रहे थे। अब आलम यह है कि रिटायरमेंट की दहलीज पर खड़े शिक्षक भी बच्चों को पढ़ाने के बजाय खुद कोचिंग सेंटर और ऑनलाइन क्लास में हाथ आजमा रहे हैं।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का आदेश: 2 साल का 'अल्टीमेटम'
सितंबर 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में कार्यरत हर शिक्षक के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
- दायरा: यह नियम उन शिक्षकों पर भी लागू होगा जिनकी नियुक्ति RTE एक्ट 2009 के लागू होने से पहले हुई थी।
- समय सीमा: कोर्ट ने शिक्षकों को योग्यता सिद्ध करने के लिए मात्र 2 वर्ष का समय दिया है।
- परिणाम: यदि शिक्षक इस अवधि में परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें 'जबरन रिटायरमेंट' (Compulsory Retirement) दे दिया जाएगा।
🏃♂️ स्कूलों से ज्यादा कोचिंग संस्थानों में लगी भीड़
नौकरी पर आए इस अप्रत्याशित संकट के कारण शिक्षकों की जीवनशैली बदल गई है। कई शिक्षक अब स्कूलों में खाली समय मिलते ही मोबाइल पर शैक्षिक वीडियो देख रहे हैं।
- ऑनलाइन और ऑफलाइन कोचिंग: बड़ी संख्या में शिक्षकों ने सवेरे या शाम के बैच में कोचिंग ज्वाइन कर ली है।
- उम्र का तकाजा: कई वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि 50 वर्ष की आयु के बाद फिर से छात्र बनकर गणित, मनोविज्ञान और भाषा की बारीकियां सीखना उनके लिए मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।
- नामांकन पर असर: 1 अप्रैल से नया सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन शिक्षकों का ध्यान छात्र नामांकन के बजाय अपनी परीक्षा की तैयारी पर अधिक केंद्रित है।
🚩 आंदोलन और सरकार की 'दोहरी नीति'
शिक्षक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी मांग है कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को इस नियम से मुक्ति दी जाए।
- दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन: 4 अप्रैल को देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली में धरना दिया, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।
- सरकार का रुख: एक तरफ सरकार शिक्षकों के साथ होने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जुलाई में प्रस्तावित यूपी-टेट के आवेदनों में शिक्षकों के लिए विशेष कॉलम जोड़ दिए गए हैं। इसे शिक्षक सरकार की "दोहरी नीति" मान रहे हैं।
📋 वर्तमान स्थिति: क्या है शिक्षकों का भविष्य?
विभागीय सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने पुष्टि की है कि बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षक आगामी पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन कर रहे हैं।
"जब नौकरी ही नहीं बचेगी, तो भविष्य कैसा? हमें उम्मीद थी कि सरकार राहत देगी, लेकिन अब परीक्षा पास करना ही एकमात्र विकल्प नजर आ रहा है।"
— एक व्यथित प्राथमिक शिक्षक
फिलहाल, उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा जगत में 'पढ़ो या छोड़ो' वाली स्थिति बनी हुई है। यदि सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो आने वाले दो सालों में यूपी के सरकारी स्कूलों में बड़े पैमाने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देखने को मिल सकती है।


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