लखनऊ/नई दिल्ली: भारत की आगामी जनगणना 2027 ऐतिहासिक होने जा रही है। यह न केवल देश की जनसांख्यिकीय स्थिति का खाका पेश करेगी, बल्कि यह भारत की पहली पूर्णतः 'डिजिटल जनगणना' भी होगी। भारत सरकार ने इस महा-अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक विशाल बजट को मंजूरी दी है, जिसमें जमीनी स्तर पर काम करने वाले प्रगणकों (Enumerators) से लेकर राज्य स्तर के अधिकारियों के मानदेय (Honorarium) में महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है।
जनगणना 2027: एक नई शुरुआत
कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना में हुए विलंब के बाद, अब सरकार 2027 में इसे नए तकनीकी स्वरूप के साथ आयोजित कर रही है। 24 दिसंबर 2025 को जनगणना परिषद संख्या 7 के माध्यम से इस विशेष बजट को स्वीकृति दी गई। इस बार का लक्ष्य "कागज रहित गणना" है, जिसमें मोबाइल एप्लिकेशन और वेब पोर्टल्स का प्राथमिक रूप से उपयोग किया जाएगा।
प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी
जनगणना की सफलता की धुरी 'प्रगणक' होते हैं, जो घर-घर जाकर डेटा एकत्र करते हैं। उनकी मेहनत को देखते हुए सरकार ने प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के लिए कुल ₹25,000 के मानदेय का प्रावधान किया है। यह राशि दो मुख्य चरणों में विभाजित की गई है:
1. प्रथम चरण (मकान सूचीकरण - HLO):
इस चरण में प्रगणक प्रत्येक क्षेत्र के मकानों की सूची तैयार करेंगे और उन्हें विशिष्ट नंबर देंगे। इस कार्य के लिए प्रत्येक प्रगणक को ₹9,000 का भुगतान किया जाएगा।
2. द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना - PE):
यह जनगणना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, धर्म, रोजगार और अन्य व्यक्तिगत विवरण दर्ज किए जाएंगे। इस कठिन और विस्तृत कार्य के लिए प्रगणकों को ₹16,000 दिए जाएंगे।
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प्रशासनिक अधिकारियों का मानदेय ढांचा
जनगणना केवल फील्ड का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा कार्य करता है। तहसील, जिला और राज्य स्तर पर निगरानी रखने वाले अधिकारियों के लिए भी मानदेय की सूची जारी की गई है:
- राज्य नोडल अधिकारी: इन्हें दोनों चरणों को मिलाकर कुल ₹75,000 (30k + 45k) का मानदेय मिलेगा।
- मंडलायुक्त / प्रमुख जनगणना अधिकारी: संभाग स्तर पर निगरानी के लिए कुल ₹60,000 का प्रावधान है।
- जिला जनगणना अधिकारी व DIO: जिले की कमान संभालने वाले इन अधिकारियों को ₹45,000 दिए जाएंगे।
- उप-जिला / चार्ज अधिकारी: स्थानीय स्तर पर समन्वय के लिए इन्हें ₹45,000 मिलेंगे।
- जनगणना लिपिक (Charge Office Clerk): डेटा एंट्री और रिकॉर्ड रखरखाव के लिए इन्हें ₹30,000 का भुगतान होगा।
डिजिटल जनगणना और तकनीकी सहायता
चूँकि यह पहली बार है जब भारत डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रह कर रहा है, इसलिए तकनीकी त्रुटियों को कम करने के लिए 'तकनीकी सहायकों' की नियुक्ति की जाएगी। ये सहायक 18 महीने की अवधि के लिए नियुक्त किए जाएंगे।
- तकनीकी सहायक: इन्हें प्रति माह अधिकतम ₹25,000 तक का मानदेय मिलेगा।
- फेसीलिटेटर: इन्हें प्रति माह ₹18,000 तक का भुगतान किया जाएगा।
| पद (Post Name) | HLO चरण (₹) | PE चरण (₹) | कुल मानदेय (₹) |
|---|---|---|---|
| प्रगणक / पर्यवेक्षक | 9,000 | 16,000 | 25,000 |
| राज्य नोडल अधिकारी | 30,000 | 45,000 | 75,000 |
| मंडलायुक्त / प्रमुख अधिकारी | 25,000 | 35,000 | 60,000 |
| जिला/नगर जनगणना अधिकारी | 20,000 | 25,000 | 45,000 |
| उप-जिला / चार्ज अधिकारी | 20,000 | 25,000 | 45,000 |
| चार्ज कार्यालय लिपिक | 12,000 | 18,000 | 30,000 |
राज्य स्तर पर 4 तकनीकी सहायक और जिला स्तर पर 2 सहायकों की तैनाती सुनिश्चित की गई है, जो प्रगणकों को मोबाइल ऐप चलाने और डेटा सिंक करने में मदद करेंगे।
कार्यालयों और बुनियादी ढांचे के लिए वित्तीय मदद
डिजिटल कार्यों के लिए कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और फील्ड में जाने के लिए वाहनों की आवश्यकता होती है। इसके लिए सरकार ने अलग से फंड आवंटित किया है:
- राज्य स्तर: आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर, वाहन/ईंधन और अन्य खर्चों के लिए कुल ₹30 लाख (10 लाख प्रति मद)।
- जिला स्तर: कुल ₹15 लाख (5 लाख प्रति मद) का बजट स्वीकृत हुआ है।
- चार्ज स्तर: स्थानीय कार्यालयों के लिए कुल ₹3 लाख (1 लाख प्रति मद) दिए जाएंगे।
PFMS: पारदर्शी भुगतान प्रणाली
अतीत में मानदेय मिलने में होने वाली देरी और भ्रष्टाचार की शिकायतों को दूर करने के लिए, सरकार ने इस बार 'Public Fund Management System' (PFMS) का सहारा लिया है।
- सभी प्रगणकों और अधिकारियों का मानदेय सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खातों में (DBT) भेजा जाएगा।
- केंद्र सरकार यह राशि राज्य सरकारों को 'Grant-in-Aid' के रूप में प्रदान करेगी।
- डेटा सबमिट होने और वेरिफिकेशन के तुरंत बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
डिजिटल जनगणना के लाभ और भविष्य की योजनाएं
जनगणना 2027 से प्राप्त डेटा भारत की भविष्य की योजनाओं की आधारशिला बनेगा। डिजिटल होने के कारण इसके कई लाभ हैं:
- सटीक डेटा: मैन्युअल गलतियों की संभावना कम होगी।
- त्वरित परिणाम: डेटा प्रोसेसिंग में लगने वाला समय कई वर्षों से घटकर कुछ महीनों में सिमट जाएगा।
- बेहतर लाभार्थी पहचान: आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना और उज्ज्वला जैसी योजनाओं के लिए पात्र परिवारों की पहचान आसान होगी।
चुनौतियां और समाधान
उत्तर प्रदेश जैसे भौगोलिक रूप से विविध और विशाल आबादी वाले राज्य में डिजिटल जनगणना करना चुनौतीपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में 'डार्क ज़ोन' (जहाँ इंटरनेट नहीं है) के लिए ऐप में 'ऑफलाइन मोड' की सुविधा दी गई है। इसके अलावा, प्रगणकों को गहन प्रशिक्षण (Training) दिया जाएगा ताकि वे तकनीक के साथ सहज हो सकें।
निष्कर्ष
जनगणना 2027 का यह नया बजट और मानदेय व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि सरकार इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य को कितनी गंभीरता से ले रही है। प्रगणकों को मिलने वाला ₹25,000 का मानदेय उनके परिश्रम का उचित सम्मान है। इससे न केवल कार्य की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि समय सीमा के भीतर डेटा संकलन भी सुनिश्चित होगा।
नोट: सभी प्रगणकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बैंक खाते और आधार की जानकारी अपडेट रखें ताकि मानदेय प्राप्त करने में कोई समस्या न हो।
प्रकाशन: Sir Ji Ki Pathshala (www.sirjikipaathshala.in)
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