लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 के पहले चरण की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्देश दिए हैं कि इस बार की जनगणना को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए। इस विशाल कार्य को संपन्न करने के लिए प्रदेश भर में लगभग 5.5 लाख प्रगणक और पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे, जिनका डिजिटल डेटाबेस 10 अप्रैल तक तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
पहली बार नागरिकों को मिलेगी स्व-गणना की सुविधा
इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी खूबी स्व-गणना (Self-Enumeration) पोर्टल है। आम नागरिक पहली बार सरकारी पोर्टल पर जाकर खुद अपने परिवार का विवरण दर्ज कर सकेंगे। यह पोर्टल 7 मई से 21 मई तक खुला रहेगा। सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक के माध्यम से डेटा को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाया जा सके।
महत्वपूर्ण तिथियां और चरण
जनगणना की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए इसे विभिन्न चरणों में विभाजित किया गया है:
- प्रशिक्षण सत्र: फील्ड में तैनाती से पहले सभी प्रगणकों को 16 अप्रैल से 7 मई के बीच गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- मकान सूचीकरण (पहला चरण): स्व-गणना की अवधि समाप्त होने के बाद, 22 मई से 20 जून तक मकानों की गणना का कार्य किया जाएगा।
- जनसंख्या गणना (दूसरा चरण): जनगणना का मुख्य और दूसरा चरण अगले वर्ष 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच आयोजित होगा।
सटीकता और तकनीक पर जोर
मुख्य सचिव ने विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों, झुग्गी बस्तियों और अधिक गतिशील जनसंख्या वाले इलाकों में सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। इस बार मकानों की जियो-टैगिंग भी की जाएगी ताकि सीमांकन में कोई त्रुटि न रहे। तकनीकी सहायकों की भर्ती प्रक्रिया को भी जल्द पूरा करने को कहा गया है ताकि डिजिटल मैपिंग का काम मजबूती से हो सके।
भारत के महारजिस्ट्रार मृत्युंजय कुमार नारायण और जनगणना निदेशक शीतल वर्मा ने अधिकारियों से इस अभियान को एक 'जन-अभियान' बनाने की अपील की है। इसके लिए जल्द ही प्रदेश भर में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोग पोर्टल का लाभ उठा सकें और जनगणना के आंकड़ों को त्रुटिरहित बनाया जा सके।


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