जनगणना 2027 का रोडमैप सरकार ने किया जारी: PDF में यहाँ से करें डाउनलोड और जानिए कैसे होगी UP में जनगणना ?
भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने जनगणना 2027 के लिए विस्तृत रोडमैप जारी कर दिया है। उत्तर प्रदेश के लिए यह प्रक्रिया विशेष रूप से महत्वपूर्ण होने वाली है क्योंकि यह न केवल पूरी तरह से डिजिटल होगी, बल्कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार इसमें प्रत्येक व्यक्ति की जाति का डेटा भी संकलित किया जाएगा।
जनगणना 2027: एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
यह वर्ष 1872 से चली आ रही निर्बाध परंपरा की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना है। कोविड-19 महामारी के कारण हुई देरी के बाद, अब इसे 2027 में संपन्न करने का लक्ष्य रखा गया है।
उत्तर प्रदेश में जनगणना का पूरा शेड्यूल
उत्तर प्रदेश में जनगणना का कार्य दो प्रमुख चरणों में संपन्न होगा:
चरण 1: मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना (HLO)
- समय: मई-जून 2026।
- अवधि: 30 दिन।
- स्व-गणना (Self-Enumeration): नागरिकों के लिए स्व-गणना पोर्टल 7 मई से 21 मई 2026 तक खुला रहेगा।
- क्षेत्र कार्य: प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर डेटा संकलन का कार्य 22 मई से 20 जून 2026 के बीच किया जाएगा।
चरण 2: जनसंख्या और जाति की गणना (PE)
- समय: 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027।
- पुनरीक्षण दौर (Revision Round): 1 मार्च से 5 मार्च 2027।
- संदर्भ तिथि: 1 मार्च 2027 के 00:00 बजे (मध्यरात्रि)।
- मुख्य विशेषता: इस चरण के दौरान प्रत्येक व्यक्ति की जाति से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और सांख्यिकीय प्रोफाइल
जनगणना के सफल संचालन के लिए राज्य की प्रशासनिक सीमाओं को 31 दिसंबर 2025 से फ्रीज कर दिया गया है। 31 मार्च 2027 तक किसी भी जिले या तहसील की सीमाओं में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
पहली बार 'डिजिटल जनगणना' और 'स्व-गणना'
इस बार कागजी फॉर्म की जगह मोबाइल ऐप का उपयोग होगा।
- स्व-गणना (Self-Enumeration): नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने परिवार का विवरण भर सकेंगे।
- SE ID: ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद एक 16-अंकों का विशिष्ट ID प्राप्त होगा, जिसे प्रगणक के आने पर उन्हें दिखाना होगा।
- गोपनीयता: जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 15 के तहत एकत्र किया गया डेटा पूरी तरह गोपनीय रहता है और इसे किसी भी अन्य उद्देश्य या कानूनी कार्रवाई के लिए साझा नहीं किया जा सकता।
जनगणना कर्मियों के लिए मानदेय
सरकार ने फील्ड कर्मियों के लिए वित्तीय प्रावधानों को भी मंजूरी दे दी है:
- कुल मानदेय: एक प्रगणक/पर्यवेक्षक को दोनों चरणों के लिए कुल ₹25,000 का मानदेय मिलेगा (HLO हेतु ₹9,000 और PE हेतु ₹16,000)।
- भुगतान विधि: यह राशि सीधे कर्मियों के बैंक खातों में PFMS के माध्यम से जमा की जाएगी。
प्रशासनिक तंत्र और कानूनी ढांचा
जनगणना का कार्य अनुच्छेद 246 के तहत संघ सूची का विषय है और यह जनगणना अधिनियम, 1948 द्वारा शासित है। उत्तर प्रदेश में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (SLCCC) का गठन किया गया है। प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी (DM) प्रमुख जनगणना अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।
महत्वपूर्ण नोट: जनगणना ड्यूटी में लापरवाही बरतने या जानकारी देने से इनकार करने पर जनगणना अधिनियम की धारा 11 के तहत दंड का प्रावधान है।
यह जनगणना न केवल जनसंख्या गिनने का एक जरिया है, बल्कि भविष्य की सरकारी योजनाओं, परिसीमन (Delimitation) और 'जन कल्याण' के लिए एक सटीक ब्लूप्रिंट प्रदान करेगी।
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