लखनऊ। उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। स्मार्ट मीटर और प्रीपेड मीटरिंग व्यवस्था को लेकर बढ़ रहे जन-आक्रोश और तकनीकी समस्याओं को देखते हुए प्रदेश सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब बैलेंस खत्म होने की स्थिति में रात के समय या सार्वजनिक अवकाश के दौरान उपभोक्ताओं के घर का अंधेरा नहीं होगा।
💡 ऊर्जा मंत्री के अहम निर्देश: रात में डिस्कनेक्शन पर रोक
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने स्मार्ट मीटर से जुड़ी उपभोक्ताओं की परेशानियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। राजधानी के संगम सभागार में आगामी गर्मियों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट आदेश दिए कि:
- नो-कट पॉलिसी: यदि किसी उपभोक्ता का प्रीपेड बैलेंस रात के समय समाप्त हो जाता है, तो सुबह होने तक उसका कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।
- अवकाश का लाभ: रविवार या किसी भी राजपत्रित अवकाश (Holiday) के दिन बैलेंस खत्म होने पर बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की जाएगी।
- समय पूर्व सूचना: उपभोक्ताओं को बैलेंस खत्म होने से काफी पहले अलर्ट भेजा जाए ताकि वे समय रहते रिचार्ज कर सकें।
📢 जन-जागरूकता और शिकायत निवारण
ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि स्मार्ट मीटर को लेकर जनता के बीच फैली भ्रांतियों और असमंजस को दूर करने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जाए।
- समर्पित काउंटर: स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए अलग से 'हेल्प डेस्क' या काउंटर स्थापित किए जाएंगे।
- प्रभावी रणनीति: शिकायतों के निस्तारण की प्रणाली को और अधिक उत्तरदायी (Accountable) बनाया जाएगा ताकि उपभोक्ताओं को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
⚖️ उपभोक्ता परिषद की मांग: प्रीपेड से पोस्टपेड की ओर
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन सख्त निर्देशों का स्वागत किया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मांग उठाई है कि:
- सहमति अनिवार्य हो: जिन 70 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बिना उनकी सहमति के प्रीपेड मोड में बदल दिए गए हैं, उन्हें तत्काल पुनः पोस्टपेड मोड में करने का विकल्प दिया जाए।
- नए कनेक्शन: नए कनेक्शनों के लिए प्रीपेड की अनिवार्यता वाले आदेश को वापस लिया जाए।
🔍 'वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग' की समीक्षा की मांग
बिजली विभाग के भीतर चल रही प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठे हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि लखनऊ समेत अन्य शहरों में लागू वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाई जाए। कर्मचारियों का तर्क है कि जिस प्रकार स्मार्ट मीटर से जनता परेशान है, उसी प्रकार इस प्रशासनिक फेरबदल से भी आम उपभोक्ता प्रभावित हो रहा है।
निष्कर्ष: सरकार का यह कदम विशेष रूप से गर्मियों के मौसम से पहले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने वाला है। स्मार्ट मीटर की तकनीकी खामियों को सुधारने और 'उपभोक्ता-हित' को सर्वोपरि रखने के मुख्यमंत्री के निर्देश बिजली विभाग की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।


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