युवाओं में बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा: NSO 2025 की स्वास्थ्य रिपोर्ट के चौंकाने वाले खुलासे
नई दिल्ली: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ताजा रिपोर्ट 'पारिवारिक सामाजिक उपभोग: स्वास्थ्य' ने देश की सेहत को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की लगभग 13.1% आबादी किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही है। सबसे डराने वाला आंकड़ा हृदय रोगों का है, जो पिछले 7 वर्षों में तीन गुना बढ़ चुके हैं।
प्रमुख आंकड़े: एक नजर में
NSO के 80वें दौर (जनवरी-दिसंबर 2025) के सर्वेक्षण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- बीमारी की दर: देश में हर 100 में से लगभग 13 लोग बीमार हैं।
- हृदय रोग में उछाल: 2017-18 में प्रति लाख आबादी पर दिल के मरीजों की संख्या 1,333 थी, जो 2025 में बढ़कर 3,891 हो गई है।
- कुल बीमारियों में हिस्सा: कुल स्वास्थ्य समस्याओं में हृदय रोग की हिस्सेदारी सबसे अधिक 25.6% है।
- लैंगिक अंतर: पुरुषों (11.8%) की तुलना में महिलाएं (14.4%) अधिक बीमार पड़ रही हैं।
युवाओं और बच्चों की स्थिति: बदलते खतरे
रिपोर्ट के अनुसार, बीमारियों का स्वरूप उम्र के साथ बदल रहा है:
- 0-14 वर्ष: बच्चों में सबसे ज्यादा समस्या संक्रमण, खांसी-जुकाम और सांस संबंधी बीमारियों की देखी गई है।
- 15-29 वर्ष: हालांकि इस आयु वर्ग में बीमारी की दर सबसे कम (4-5%) है, लेकिन इनमें मानसिक स्वास्थ्य और पेट संबंधी समस्याओं में भारी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, अब युवा भी दिल की बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं।
- 30 वर्ष के बाद: हृदय रोगों का जोखिम 30 साल की उम्र के बाद तेजी से बढ़ता है। 45-59 वर्ष के आयु वर्ग में 30% से अधिक लोग दिल की बीमारियों से प्रभावित हैं।
संक्रामक रोग घटे, जीवनशैली की बीमारियां बढ़ीं
एक सकारात्मक पहलू यह है कि देश में संक्रमण (Infections) से होने वाली बीमारियों में कमी आई है। 2017-18 के मुकाबले संक्रमण के मामले 2,547 से घटकर 2,302 रह गए हैं। लेकिन इसकी जगह अब उच्च रक्तचाप (High BP), मधुमेह (Diabetes) और हृदय रोगों ने ले ली है, जो मुख्य रूप से खराब जीवनशैली और खान-पान का परिणाम हैं।
बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा बोझ
स्वास्थ्य के मामले में सबसे संवेदनशील वर्ग बुजुर्ग हैं। 60 वर्ष से अधिक आयु के 42 से 45 प्रतिशत लोग बीमार पाए गए हैं। इनमें से 37.8% मामले केवल दिल से संबंधित बीमारियों के हैं।
निष्कर्ष: NSO की यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि संक्रामक रोगों पर जीत हासिल करने के बावजूद, भारत अब एक 'साइलेंट किलर' यानी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की महामारी की ओर बढ़ रहा है। युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव और हृदय रोग भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती हैं।


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