"दिल्ली में उमड़ा शिक्षकों का सैलाब: रामलीला मैदान से सरकार को अल्टीमेटम, 'TET बाध्यता' पर आर-पार की जंग!"
नई दिल्ली | देश की राजधानी का हृदय स्थल कहा जाने वाला रामलीला मैदान आज एक बार फिर गवाह बना एक बड़े जन-आंदोलन का। जब देशभर के कोने-कोने से आए लाखों शिक्षकों की आवाज ने दिल्ली के सत्ता गलियारों में हलचल पैदा कर दी। मौका था 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET) की पूर्वव्यापी (Retrospective) अनिवार्यता के खिलाफ आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन का।
आंदोलन का मुख्य केंद्र: रामलीला मैदान से उठती हुंकार
हाथों में तिरंगा, बैनर और अपनी मांगों के पोस्टर लिए शिक्षकों का हुजूम सुबह से ही जुटना शुरू हो गया था। यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन हजारों अनुभवी शिक्षकों के अस्तित्व की लड़ाई बन गई है, जो वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं।
प्रदर्शन के मुख्य आकर्षण और नारे:
- "No TET Before RTE Act": शिक्षकों का तर्क है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर नए नियम थोपना संवैधानिक रूप से गलत है।
- "Save Senior Teachers": अनुभवी शिक्षकों ने मांग की कि उनकी वरिष्ठता और अनुभव को पात्रता परीक्षा के तराजू में न तौला जाए।
विवाद की जड़: क्यों उबले हैं शिक्षक?
दरअसल, विवाद की मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों का पूर्व प्रभाव से लागू होना है। शिक्षकों का पक्ष है कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, तब पात्रता की शर्तें अलग थीं। अब दशकों की सेवा के बाद उन्हें फिर से पात्रता साबित करने के लिए कहना न केवल उनके मानसिक स्वाभिमान को ठेस पहुंचाता है, बल्कि उनकी सेवा निरंतरता पर भी तलवार लटकाता है।
"हम परीक्षा के विरोधी नहीं हैं, हम उस अन्याय के विरोधी हैं जो सेवा में कार्यरत शिक्षकों पर पिछले दरवाजे से नियम थोपकर किया जा रहा है। एक शिक्षक जो 15 साल से पढ़ा रहा है, उसे आज अपनी योग्यता साबित करने के लिए कहना हास्यास्पद और अपमानजनक है।"
— शिक्षक नेता (मंच संबोधन के दौरान)सरकार को चेतावनी: 'अभी यह शुरुआत है'
मंच से हुंकार भरते हुए विभिन्न राज्यों के शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया कि यदि केंद्र सरकार और संबंधित विभाग इस पर कोई न्यायसंगत नीति नहीं बनाते, तो यह आंदोलन दिल्ली की सीमाओं से निकलकर हर राज्य की राजधानी तक पहुंचेगा।
प्रमुख मांगें:
- कार्यरत शिक्षकों को टेट (TET) की बाध्यता से पूर्णतः मुक्त रखा जाए।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश को 'प्रोस्पेक्टिव' (भविष्यगामी) आधार पर लागू किया जाए, न कि 'रिट्रोस्पेक्टिव' (पूर्वव्यापी) आधार पर।
- अनुभव के आधार पर शिक्षकों को सीधे तौर पर छूट प्रदान की जाए।
प्रशासनिक स्थिति और भविष्य की राह
रामलीला मैदान में बढ़ती भीड़ को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है। हालांकि, प्रदर्शन अब तक पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है, लेकिन शिक्षकों का जोश और जुनून यह बता रहा है कि वे इस बार आर-पार के मूड में हैं।
शाम होते-होते शिक्षक प्रतिनिधियों का एक शिष्टमंडल संबंधित मंत्रालय को ज्ञापन सौंपने की तैयारी में था। अब देखना यह होगा कि सरकार इन राष्ट्र-निर्माताओं की गुहार पर क्या रुख अपनाती है।


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