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यूपी में साक्षरता का महाभियान: 10 लाख निरक्षरों को शिक्षित करने का बड़ा लक्ष्य, शिक्षामित्र बनेंगे 'सर्वेयर'

Sir Ji Ki Pathshala

UP Nav Bharat Saksharta Karyakram: Target to Make 10 Lakh People Literate by 2026

​उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा परिषद ने राज्य में शिक्षा का स्तर सुधारने और साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए 'नव भारत साक्षरता कार्यक्रम' की तैयारियों को तेज कर दिया है। केंद्र सरकार के 'उल्लास' (ULLAS) पोर्टल के माध्यम से संचालित होने वाले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य 15 वर्ष से अधिक आयु के उन लोगों को बुनियादी शिक्षा प्रदान करना है, जो किसी कारणवश कभी स्कूल नहीं जा सके।

UP Nav Bharat Saksharta Karyakram Ullas Portal

2026 तक का मास्टर प्लान

​शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026 तक प्रदेश के 10 लाख निरक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए जिलावार रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इस अभियान के तहत मुख्य रूप से दो चरणों में परीक्षा आयोजित की जाएगी:

  1. सितंबर माह की परीक्षा
  2. मार्च माह की परीक्षा

​सफल होने वाले अभ्यर्थियों को सरकार द्वारा साक्षरता प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा।

👉 इसे भी पढ़ें: उल्लास ऐप (ULLAS App): रजिस्ट्रेशन, सर्वे और टैगिंग की संपूर्ण मार्गदर्शिका

शिक्षामित्र बनेंगे 'सर्वेयर' की रीढ़

​इस कार्यक्रम को धरातल पर उतारने के लिए परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • पंजीकरण: शिक्षामित्रों का 'उल्लास' पोर्टल पर सर्वेयर के रूप में पंजीकरण किया जाएगा।
  • पहचान: ये सर्वेयर अपने क्षेत्र में 15 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे लोगों को चिह्नित करेंगे जिन्हें बुनियादी अक्षरों और अंकों का ज्ञान नहीं है।
  • जागरूकता: योजना को जन-जन तक पहुँचाने के लिए स्कूलों में रैलियां, नुक्कड़ नाटक, वॉल पेंटिंग और बैनर-पोस्टर का सहारा लिया जाएगा।

स्वयंसेवकों की फौज और सामुदायिक सहभागिता

​अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देशों के अनुसार, इस अभियान में केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को 'वालेंटियर' के रूप में जोड़ा जाएगा। इनमें शामिल होंगे:

  • ​कक्षा 5 और उससे ऊपर के छात्र।
  • ​NSS, NCC, B.Ed. और D.El.Ed. के विद्यार्थी।
  • स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और आंगनबाड़ी कार्यकत्री।
महत्वपूर्ण तथ्य: प्रत्येक स्वयंसेवक को कम से कम 4 से 5 लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य दिया गया है। खास बात यह है कि यह सेवा पूरी तरह से नि:स्वार्थ (मानदेय रहित) होगी।

    200 घंटे की विशेष कक्षाएं

    ​चिह्नित किए गए असाक्षरों के लिए परीक्षा से पूर्व 200 घंटे की विशेष कक्षाओं का आयोजन किया जाएगा। इन कक्षाओं में उन्हें पढ़ना, लिखना और बुनियादी गणित (अंकों का ज्ञान) सिखाया जाएगा, ताकि वे अपने दैनिक जीवन के कार्य जैसे बैंक फॉर्म भरना, अखबार पढ़ना और हिसाब-किताब करना आसानी से कर सकें।

    निष्कर्ष

    ​यह अभियान न केवल साक्षरता के आंकड़ों में सुधार लाएगा, बल्कि उन लाखों लोगों को आत्मविश्वास प्रदान करेगा जो अब तक शिक्षा की मुख्यधारा से कटे हुए थे। 'उल्लास' पोर्टल और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से उत्तर प्रदेश एक 'पूर्ण साक्षर प्रदेश' बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।

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