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नारी शक्ति का संकल्प: पीएम मोदी का विपक्ष पर तीखा प्रहार, कहा— 'हक दिलाकर ही दम लेंगे'

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली|भारतीय राजनीति के इतिहास में महिला सशक्तिकरण के अध्याय को लेकर जारी खींचतान अब एक नए और आक्रामक मोड़ पर आ गई है। लोकसभा में महिला आरक्षण के लिए लाए गए संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। यह संबोधन केवल एक राजनैतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के प्रति संवेदना और विरोधियों के प्रति एक खुली चेतावनी थी। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भले ही आज संसद में संख्याबल की कमी के कारण यह विधेयक रुक गया हो, लेकिन वे नारी शक्ति को उनका हक दिलाकर ही दम लेंगे।

PM Modi speech on Women Reservation Bill

विपक्ष की मेजें थपथपाने पर उठाए सवाल

​प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत देश की माताओं और बहनों से सार्वजनिक माफी मांगते हुए की। उन्होंने कहा कि एक सरकार के मुखिया के तौर पर उन्हें इस बात का दुख है कि तमाम प्रयासों के बाद भी विपक्षी दलों के अवरोध के कारण महिलाओं के सपनों को "निर्दयतापूर्वक कुचल" दिया गया।

​मोदी ने कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके जैसी पार्टियों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जब सदन में नारी हित का प्रस्ताव गिर रहा था, तब विपक्ष का मेजें थपथपाना और जश्न मनाना बेहद शर्मनाक था। उन्होंने इसे देश की हर महिला के आत्मसम्मान पर गहरी चोट बताया। प्रधानमंत्री ने तीखा हमला करते हुए कहा, "विपक्षी दलों ने महिला अधिकारों की ‘भ्रूण हत्या’ की है। यह व्यवहार देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।"

'नारी अपमान नहीं भूलती': प्रधानमंत्री की चेतावनी

​प्रधानमंत्री ने भारतीय समाज की संवेदनशीलता का जिक्र करते हुए विपक्षी नेताओं को चेतावनी दी कि महिलाएं अपना अपमान कभी नहीं भूलतीं। उन्होंने कहा कि संसद में जो व्यवहार कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने किया है, उसकी टीस और कसक हर नारी के मन में बनी रहेगी।

​मोदी ने कहा, "जब भी ये नेता अपने क्षेत्रों में वोट मांगने जाएंगे, तब देश की बहनें-बेटियां इनसे सवाल करेंगी। महिलाएं याद रखेंगी कि यही वे लोग हैं जिन्होंने उनकी राजनीतिक भागीदारी और सशक्तिकरण के रास्ते में कांटे बिछाए थे।" प्रधानमंत्री के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले चुनावों में महिला आरक्षण का मुद्दा एक बड़ा चुनावी हथियार बनने वाला है।

संकल्प और अडिग इरादा

​विधेयक गिरने के बावजूद प्रधानमंत्री के सुर में हताशा के बजाय एक नया संकल्प दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि उनकी हिम्मत अटूट और इरादा अडिग है।

​"कल हमारे पास संख्याबल नहीं था, इसका मतलब यह नहीं कि हम हार गए। हमारा प्रयास नहीं रुकेगा। महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाली हर रुकावट को हम हटाकर रहेंगे। यह वक्त का इंतजार है, लेकिन नारी शक्ति की भागीदारी को अब कोई रोक नहीं पाएगा।"


​प्रधानमंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी सरकार केवल कानून बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस संकल्प को 'आधी आबादी' के सपनों की उड़ान से जोड़ा।

दलहित बनाम देशहित की राजनीति

​संबोधन के अंतिम पड़ाव में पीएम मोदी ने 'दलहित' और 'देशहित' के बीच के अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मेरे लिए हमेशा देशहित सर्वोपरि रहा है, लेकिन विपक्ष के लिए अपनी पार्टी का स्वार्थ ही सब कुछ है। जब 'दलहित' देशहित से बड़ा हो जाता है, तो उसका खामियाजा समाज के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ यानी नारी शक्ति को भुगतना पड़ता है।

​उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे देखें कि कैसे एक बड़ी साजिश के तहत महिलाओं को नेतृत्व करने से रोकने की कोशिश की जा रही है। मोदी ने विश्वास दिलाया कि वे इस साजिश को सफल नहीं होने देंगे और हर कीमत पर महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाएंगे।

निष्कर्ष

​प्रधानमंत्री का यह रुख स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक को केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक मिशन की तरह देख रही है। विपक्ष पर लगाए गए 'भ्रूण हत्या' जैसे कड़े शब्द और महिलाओं से सीधे संवाद की यह शैली आगामी राजनीति की दिशा तय करेगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष प्रधानमंत्री के इन गंभीर आरोपों का जवाब किस प्रकार देता है और आने वाले समय में सरकार इस संकल्प को कानून की शक्ल देने के लिए क्या नई रणनीति अपनाती है।

स्रोत: updatemarts.com (प्राइमरी का मास्टर)

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