लोन गारंटर (Loan Guarantor) बनने से पहले सौ बार सोचें: मदद की भावना कहीं बन न जाए गले की फांस
अक्सर भावनाओं में बहकर या किसी करीबी रिश्तेदार के दबाव में आकर हम लोन गारंटर (Loan Guarantor) बनने के लिए तैयार हो जाते हैं। हमें लगता है कि यह महज एक 'कागजी खानापूर्ति' है, लेकिन बैंकिंग और कानूनी शब्दावली में इसके मायने बहुत गहरे हैं। एक गलत हस्ताक्षर आपकी जीवन भर की जमा-पूंजी को खतरे में डाल सकता है।
1. कानूनी रूप से आप भी हैं 'कर्जदार'
भारतीय कानून और बैंकिंग नियमों के अनुसार, एक गारंटर की जिम्मेदारी 'Co-extensive' होती है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि मुख्य कर्जदार (Borrower) डिफॉल्ट करता है, तो बैंक को यह अधिकार है कि वह सीधे आपसे वसूली शुरू कर दे। बैंक को इसके लिए मुख्य कर्जदार की संपत्ति पूरी तरह खत्म होने का इंतज़ार करने की जरूरत नहीं है।
2. आपके क्रेडिट स्कोर की 'बलि'
जब आप किसी के लोन की गारंटी लेते हैं, तो वह लोन आपके CIBIL (सिबिल) रिकॉर्ड में भी दिखाई देता है।
- EMI में देरी: यदि मुख्य कर्जदार किश्त देने में देरी करता है, तो आपका क्रेडिट स्कोर भी गिरेगा।
- आपकी अपनी लोन क्षमता: चूंकि आपके नाम पर पहले से ही एक 'संभावित कर्ज' (Contingent Liability) दर्ज है, इसलिए जब आप खुद के लिए होम लोन या कार लोन लेने जाएंगे, तो बैंक आपकी लोन पात्रता (Eligibility) को कम कर देगा।
3. संपत्ति की कुर्की का जोखिम
यदि कर्जदार लोन चुकाने में पूरी तरह असमर्थ रहता है, तो बैंक 'सरफेसी एक्ट' (SARFAESI Act) के तहत आपकी संपत्ति (घर, प्लॉट या दुकान) को जब्त कर सकता है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए यह स्थिति सबसे भयावह होती है क्योंकि उनकी पेंशन और ग्रेच्युटी की रकम भी कानूनी दांव-पेच में फंस सकती है।
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4. गारंटर के अधिकार (जो आपको पता होने चाहिए)
गारंटर बनना केवल जोखिमों का खेल नहीं है, कानून आपको कुछ सुरक्षा भी देता है:
- सूचना का अधिकार: यदि कर्जदार किश्तें नहीं भर रहा है, तो बैंक का यह कर्तव्य है कि वह आपको इसकी समय पर सूचना दे।
- वसूली का अधिकार (Right of Subrogation): यदि आप बैंक का कर्ज चुका देते हैं, तो आप कानूनन मुख्य कर्जदार की जगह ले लेते हैं। अब आप उस व्यक्ति से कानूनी रूप से अपनी रकम वसूलने का अधिकार रखते हैं।
सुरक्षित रहने के उपाय: क्या करें और क्या न करें?
- लोन की राशि और प्रकार देखें: केवल उसी लोन की गारंटी लें जिसकी राशि इतनी कम हो कि जरूरत पड़ने पर आप उसे चुका सकें। कभी भी 'अनलिमिटेड गारंटी' वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न करें।
- को-एप्लिकेंट और गारंटर में फर्क समझें: को-एप्लिकेंट लोन में बराबर का भागीदार होता है, जबकि गारंटर केवल डिफॉल्ट की स्थिति में जिम्मेदार होता है। कभी भी किसी के व्यवसाय के लिए को-एप्लिकेंट न बनें जब तक आप उसमें भागीदार न हों।
- एग्जिट क्लॉज (Exit Clause): बैंक से पूछें कि क्या भविष्य में आप अपनी गारंटी वापस ले सकते हैं। अक्सर यदि कर्जदार किसी अन्य गारंटर को ले आता है, तो पुराने गारंटर को मुक्त किया जा सकता है।
- टर्म इंश्योरेंस अनिवार्य करवाएं: यदि आप गारंटी दे रहे हैं, तो शर्त रखें कि कर्जदार उस लोन राशि का एक 'टर्म प्लान' ले और उसमें बैंक को नामांकित (Nominee) करे। इससे मृत्यु जैसी स्थिति में आपकी संपत्ति सुरक्षित रहेगी।
निष्कर्ष
किसी की मदद करना नेक काम है, लेकिन अपनी आर्थिक सुरक्षा की कीमत पर नहीं। याद रखें, बैंक आपसे गारंटी इसलिए मांग रहा है क्योंकि उसे मुख्य कर्जदार की चुकाने की क्षमता पर संदेह है। यदि बैंक को उन पर भरोसा नहीं है, तो आपको अपनी मेहनत की कमाई पर दांव लगाने से पहले गंभीरता से सोचना चाहिए।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल वित्तीय साक्षरता के उद्देश्य से है। लोन संबंधी किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले कानूनी विशेषज्ञ या वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें।


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