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कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के कायाकल्प की तैयारी, बजट 2026-27 के लिए प्रस्ताव आमंत्रित

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश की बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सक्रिय नज़र आ रही है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को एक महत्वपूर्ण पत्र जारी किया गया है। इस पत्र के माध्यम से वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना एवं बजट (AWP&B) के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) से संबंधित प्रस्तावों की मांग की गई है।

UP Government Order for KGBV Schools 2026

बुनियादी ढांचे और सुविधाओं पर विशेष जोर

​सरकार का लक्ष्य इन आवासीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाना है। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, निम्नलिखित मदों के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं:

  • जर्जर भवनों का नवीनीकरण: जर्जर हो चुके स्कूल भवनों की रिपोर्ट रंगीन फोटोग्राफ के साथ जिला स्तर पर तकनीकी समिति से प्रमाणित कराकर भेजने को कहा गया है।
  • अतिरिक्त निर्माण: स्कूलों में एडिशनल डोरमेट्री, टॉयलेट ब्लॉक, कंप्यूटर लैब, गार्ड रूम और सेप्टिक टैंक के निर्माण का प्रस्ताव दिया जा सकता है।
  • आधुनिक उपकरण: उच्चीकृत विद्यालयों में सीसीटीव्ही (CCTV) कैमरे, जनसेट, रोटी मेकिंग मशीन और कमर्शियल वाशिंग मशीन जैसी सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • शिक्षा और नवाचार: खगोल विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए 'एस्ट्रोनॉमी लैब' और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए संगीत वाद्ययंत्रों के प्रस्ताव भी मांगे गए हैं।

छात्राओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए 'विशेष प्रोजेक्ट'

​बजट में केवल बुनियादी ढांचे ही नहीं, बल्कि छात्राओं के व्यक्तिगत विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। 'स्पेशल प्रोजेक्ट फॉर इक्विटी' के तहत तीन मुख्य योजनाओं को प्राथमिकता दी गई है:

  1. रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण: छात्राओं को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के लिए मार्शल आर्ट्स/सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग।
  2. कैपेसिटी जेंडर सेंसिटाइजेशन: लिंग संवेदीकरण के माध्यम से जागरूकता बढ़ाना।
  3. लाइफ स्किल एजुकेशन: किशोरियों को जीवन कौशल की शिक्षा देना ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

खेल और स्वास्थ्य पर निवेश

​विद्यालयों में छात्राओं के शारीरिक विकास के लिए ओपन जिम और सोलर गीजर की व्यवस्था करने का भी प्रावधान है। साथ ही, कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए हर तीन साल में एक बार बेडिंग रिप्लेसमेंट (बिस्तर बदलना) का प्रस्ताव भी अनिवार्य रूप से शामिल करने को कहा गया है।

30 अप्रैल तक की समय सीमा

​अपर परियोजना निदेशक राजेन्द्र प्रसाद द्वारा जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी जिलों को अपने प्रस्ताव हार्ड कॉपी में जिला समन्वयक (बालिका शिक्षा) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर के साथ 30 अप्रैल 2026 तक उपलब्ध कराने होंगे।

निष्कर्ष: यह पहल दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश सरकार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को केवल एक स्कूल नहीं, बल्कि बालिकाओं के लिए एक सुरक्षित, आधुनिक और सर्वांगीण विकास का केंद्र बनाने की दिशा में ठोस काम कर रही है। समयबद्ध प्रस्तावों से यह उम्मीद जगी है कि आगामी सत्र में इन विद्यालयों की सूरत और सीरत दोनों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

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