लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने के लिए लागू की गई डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग ने अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय द्वारा जारी एक हालिया आदेश में प्रदेश के दर्जनों जिलों में छात्रों की उपस्थिति प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड न किए जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गई है। महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से की गई समीक्षा में कई जिलों की स्थिति अत्यंत असंतोषजनक और खेदजनक पाई गई है।
शासन द्वारा पूर्व में भी कई बार निर्देश दिए गए थे कि सभी परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की उपस्थिति प्रतिदिन डिजिटल पंजिका के माध्यम से प्रेरणा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड की जाए। हालांकि, 16 अप्रैल 2026 को जनपदवार प्राप्त रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार गोंडा, मुरादाबाद, हमीरपुर, आगरा, उन्नाव, महोबा, बहराइच, आजमगढ़, बलरामपुर, शाहजहाँपुर, श्रावस्ती, कासगंज, झाँसी, रामपुर, बदायूँ, अम्बेडकरनगर, गाजीपुर, अयोध्या, गोरखपुर और देवरिया जैसे प्रमुख जिलों में डिजिटल उपस्थिति की स्थिति बहुत खराब है।
महानिदेशक ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे तत्काल खण्ड शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक कर इस मामले की गहन समीक्षा करें। आदेश में साफ कहा गया है कि यह सुनिश्चित करना जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि शत-प्रतिशत विद्यालयों का डेटा प्रतिदिन पोर्टल पर दिखे। विभाग का मानना है कि डिजिटल उपस्थिति के अभाव में छात्र कल्याण से जुड़ी योजनाओं की सटीक निगरानी संभव नहीं हो पा रही है।
इस कड़े आदेश के बाद अब शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि डिजिटल उपस्थिति की प्रक्रिया में सुधार नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों और विद्यालयों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य तकनीक के माध्यम से शिक्षा तंत्र में जवाबदेही तय करना है, जिसे लेकर अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।





