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परिषदीय उच्च प्राथमिक एवं कम्पोजिट विद्यालयों में सत्र 2026-27 से नया 'समग्र प्रगति पत्र' (हॉलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड) लागू। जानें कैसा होगा 8 पन्नों का नया रिपोर्ट कार्ड?

Sir Ji Ki Pathshala

यूपी के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों का बनेगा समग्र प्रगति पत्र': रट्टा मार पढ़ाई नहीं, कौशल और व्यवहार पर होगा फोकस

Holistic Progress Card Basic School UP

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्वरूप अब पूरी तरह बदलने जा रहा है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए जारी किए गए नए निर्देशों के अनुसार, कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए 'समग्र प्रगति पत्र' (Holistic Progress Card - HPC) अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि रट्टा-मार शिक्षा प्रणाली को जड़ से खत्म कर बच्चों के व्यक्तित्व, कौशल और व्यवहार को निखारने की एक बड़ी मुहिम है।

​समग्र प्रगति पत्र (HPC) की आवश्यकता और विजन

​पारंपरिक रिपोर्ट कार्ड केवल किताबी ज्ञान और परीक्षा के अंकों तक सीमित थे, जिससे बच्चों के अन्य हुनर दब जाते थे। नई शिक्षा नीति (NEP) के विजन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह 8-पृष्ठों का प्रगति पत्र बच्चे के 360-डिग्री मूल्यांकन पर आधारित है। इसका मूल मंत्र है कि घर और विद्यालय की साझेदारी से बच्चे बेहतर सीखते हैं।

​रिपोर्ट कार्ड का नया स्वरूप: 8 पृष्ठों का विस्तृत विवरण

​नए 'समग्र प्रगति पत्र' में छात्र की हर छोटी-बड़ी गतिविधि के लिए स्थान निर्धारित किया गया है:

  • छात्र का व्यक्तिगत एवं स्वास्थ्य प्रोफ़ाइल: पहले पृष्ठ पर विद्यार्थी की सामान्य जानकारी के साथ-साथ APAAR आईडी और PEN (Permanent Education Number) दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा, अप्रैल और जनवरी माह में बच्चे की लंबाई, वजन, आंखों की रोशनी और ब्लड ग्रुप का विवरण भी अंकित होगा।

  • संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development): इसमें भाषा (हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत/उर्दू), गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में छात्र की दक्षता का मूल्यांकन किया जाता है।

  • व्यवहार एवं जीवन कौशल: यह भाग बच्चे की भावनात्मक समझ, दूसरों के प्रति सहानुभूति, तनाव प्रबंधन और सामाजिक जिम्मेदारी पर केंद्रित है।

  • रुचि और आकांक्षाएं: 'मुझे पसंद है' खंड के माध्यम से छात्र की पसंद के त्यौहार, भोजन, मित्र और उसके भविष्य के लक्ष्यों को भी रिकॉर्ड में रखा जाएगा।

​मूल्यांकन की अभिनव पद्धति: 'सितारों' से सजेगी प्रगति

​इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी क्रांतिकारी पहल यह है कि इसमें सीखने के परिणामों के लिए संज्ञानात्मक पक्ष में अंकों का प्रयोग नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, तीन प्रतीकात्मक स्तरों वाली प्रणाली अपनाई गई है:

स्काई (Sky): यह उच्चतम स्तर है, जहाँ विद्यार्थी उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है और सीखना खुले आकाश की तरह विस्तृत होता है।

माउंटेन (Mountain): यह मध्यम स्तर है, जहाँ विद्यार्थी अवधारणा को समझ चुका है और प्रगति पर है, लेकिन उसे शिक्षक के मार्गदर्शन की आवश्यकता पड़ती है।

स्ट्रीम (Stream): यह प्रारंभिक स्तर है, जहाँ सीखने की धारा शुरू हो चुकी है, पर अभी प्रवाह विकसित होना शेष है।

​त्रिपक्षीय भागीदारी: छात्र, शिक्षक और अभिभावक

​यह प्रगति पत्र एक सहभागी दस्तावेज़ है, जिसमें तीन प्रमुख पक्षों की भूमिका सुनिश्चित की गई है:

  • छात्र का 'स्व-आकलन' (Self-Assessment): विद्यार्थियों को स्वयं यह सोचने के लिए प्रेरित किया जाएगा कि वे अपनी पढ़ाई और जीवन की स्थितियों के बारे में क्या सोचते हैं। उन्हें यह बताना होगा कि क्या वे नई चीजें सीखने में रुचि रखते हैं या चुनौतियों को हल करने का प्रयास करते हैं।

  • अभिभावक प्रतिपुष्टि (Parental Feedback): अभिभावकों को यह बताना है कि क्या बच्चा घर पर संसाधनों का सही उपयोग कर रहा है और परिवार के प्रति संवेदनशील व्यवहार कर रहा है। सितंबर और मार्च में शिक्षक-अभिभावक संवाद अनिवार्य है।

  • शिक्षकों की विशेष प्रतिक्रिया: सत्र के अंत में शिक्षक प्रत्येक छात्र के बारे में 'सकारात्मक' और 'सुधारात्मक' फीडबैक देंगे।

​परीक्षा परिणाम और ग्रेडिंग संरचना

​यद्यपि मुख्य जोर होलिस्टिक विकास पर है, लेकिन औपचारिक परीक्षाओं के लिए एक सुव्यवस्थित ग्रेडिंग स्केल (A1 से D2) लागू किया गया है। परीक्षा परिणाम के अंतर्गत प्रथम एवं द्वितीय सत्र परीक्षा, अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षा में विषयवार ग्रेडिंग अंकित की जाएगी। सफल छात्रों को अगले शैक्षिक सत्र के लिए कक्षा 9 में कक्षोन्नति प्रदान की जाएगी।

​क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक निर्देश

​महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि कक्षा 6 से 8 के लिए इस नए प्रारूप को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। प्रगति पत्र की प्रविष्टियां साल में दो बार—सितंबर के अंत में और मार्च के अंत में—अनिवार्य रूप से भरी जाएंगी।

​निष्कर्ष: शिक्षा की नई दिशा

​उत्तर प्रदेश सरकार का यह 'समग्र प्रगति पत्र' शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा। यह न केवल छात्रों को अंकों की प्रतिस्पर्धा से मुक्त करेगा, बल्कि उन्हें एक बेहतर नागरिक बनने के लिए आवश्यक 'जीवन कौशल' सिखाएगा। शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों के बीच का यह नया संवाद तंत्र प्रदेश की बुनियादी शिक्षा को राष्ट्रीय मानकों के समकक्ष खड़ा करने की क्षमता रखता है


UP School Holistic Progress Card Format