Type Here to Get Search Results !
ADVERTISEMENT

UP TET: दूरस्थ शिक्षा D.El.Ed धारक शिक्षकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, परीक्षा में शामिल होने की अनुमति

Sir Ji Ki Pathshala

UP TET: दूरस्थ शिक्षा से डिप्लोमा प्राप्त शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी, हाईकोर्ट ने दी परीक्षा में शामिल होने की हरी झंडी

High Court order for UP TET distance learning teachers

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में कार्यरत उन हजारों शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर आई है, जिनकी पात्रता को लेकर लंबे समय से संशय बना हुआ था। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक अहम सुनवाई के दौरान दूरस्थ शिक्षा (Distance Education) के माध्यम से D.El.Ed डिप्लोमा प्राप्त करने वाले शिक्षकों को आगामी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) में शामिल होने की अंतरिम अनुमति दे दी है। इस आदेश के बाद अब सरकार और परीक्षा नियामक प्राधिकरण इन अभ्यर्थियों को परीक्षा से वंचित नहीं कर सकेंगे।

मामले की पृष्ठभूमि और विवाद का कारण

​विवाद की मुख्य जड़ वह तकनीकी पेंच था, जिसके तहत दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से प्राप्त डिप्लोमा की वैधता पर सवाल उठाए जा रहे थे। दरअसल, प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक सेवारत थे जिन्होंने अनिवार्य योग्यता प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर पत्राचार या दूरस्थ माध्यम से अपनी ट्रेनिंग पूरी की थी।

​जब इन शिक्षकों ने आगामी TET परीक्षा के लिए अपनी दावेदारी पेश की, तो नियमों की पेचीदगियों के कारण उनके आवेदन पर तलवार लटकने लगी। इसी के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और तर्क दिया कि जब उन्होंने सरकारी निर्देशों के पालन में ही यह डिग्री हासिल की है, तो उन्हें अपात्र मानना अनुचित है।

हाईकोर्ट का हस्तक्षेप और शिक्षकों के तर्क

​सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि इन शिक्षकों ने सेवा में रहते हुए अपनी योग्यता में सुधार किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूर्व में भी अदालतों ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई पाठ्यक्रम मान्यता प्राप्त संस्था से किया गया है, तो उसके माध्यम (नियमित या दूरस्थ) के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।

​कोर्ट ने इन तर्कों को गंभीरता से लेते हुए माना कि जिन अभ्यर्थियों ने तय समयसीमा के भीतर अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, उन्हें परीक्षा देने से रोकना उनके करियर के साथ अन्याय होगा। इसी आधार पर अदालत ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए उन्हें परीक्षा में बैठने का अधिकार दिया है।

शिक्षकों के भविष्य पर प्रभाव और व्यापक राहत

​अदालत के इस फैसले का असर केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। यह उन हजारों परिवारों के लिए भी सुकून की खबर है जिनकी आजीविका और पदोन्नति इस योग्यता पर टिकी थी। यदि कोर्ट यह अनुमति नहीं देता, तो इन शिक्षकों के सामने न केवल TET से बाहर होने का खतरा था, बल्कि भविष्य में होने वाली विभागीय तरक्की और वेतन वृद्धि के रास्ते भी बंद हो जाते।

​इस आदेश के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि दूरस्थ शिक्षा से डिप्लोमा प्राप्त करना कोई बाधा नहीं है, बशर्ते वह सरकार द्वारा तय मानकों के भीतर पूरा किया गया हो। शिक्षकों के संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे "न्याय की जीत" बताया है।

सरकार से जवाब तलब और अगली प्रक्रिया

​हाईकोर्ट ने केवल राहत ही नहीं दी है, बल्कि राज्य सरकार और परीक्षा नियामक प्राधिकरण (PNP) को नोटिस जारी कर इस पूरे मामले पर जवाब भी मांगा है। अदालत यह जानना चाहती है कि आखिर किन परिस्थितियों में इन शिक्षकों की पात्रता पर प्रश्नचिह्न लगाया गया था।

​फिलहाल, कोर्ट के इस आदेश के बाद अब रास्ता साफ है कि पात्र अभ्यर्थी अपनी तैयारी जारी रखें और आगामी परीक्षा में सम्मिलित हों। हालांकि, यह राहत अभी अंतरिम है और इस पर अंतिम मुहर अगली सुनवाई के दौरान सरकार के जवाब और कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद ही लगेगी।

Top Post Ad

ADVERTISEMENT

Bottom Post Ad

ADVERTISEMENT