लखनऊ। उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में इन दिनों एक नई हलचल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगामी प्रदेश व्यापी दौरों की आहट ने शिक्षा विभाग के गलियारों में खलबली मचा दी है। शासन से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारी इस समय 'अलर्ट मोड' पर हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि धरातलीय हकीकत को परखने की एक कठोर परीक्षा होने वाली है।
अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों (JD), सहायक निदेशकों (AD), जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को कड़े लहजे में निर्देश जारी किए हैं। उनका संदेश साफ है— "अब कागजी घोड़े दौड़ाने से काम नहीं चलेगा, काम जमीन पर दिखना चाहिए।"
मुख्यमंत्री की 'स्पेशल-10' चेकलिस्ट: जहाँ फंस सकते हैं अफसर
शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, मुख्यमंत्री किसी भी समय किसी भी राजकीय इंटर कॉलेज या प्राथमिक विद्यालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। निरीक्षण के दौरान उनकी पैनी नजर निम्नलिखित 10 मुख्य बिंदुओं पर टिकी होगी:
1. शिक्षा की गुणवत्ता (Quality of Education)
सबसे महत्वपूर्ण मानक छात्रों का 'लर्निंग लेवल' है। केवल पाठ्यक्रम पूरा करना काफी नहीं होगा। मुख्यमंत्री खुद छात्रों से सवाल पूछकर यह जान सकते हैं कि उन्हें पढ़ाया गया विषय कितना समझ आया है। शैक्षणिक परिणाम और ग्रेडिंग इस बार अधिकारियों की साख तय करेगी।
2. शिक्षकों की समयबद्ध उपस्थिति
अक्सर देखा जाता है कि दूर-दराज के स्कूलों में शिक्षक अपनी सुविधानुसार आते-जाते हैं। अब ऐसा करना भारी पड़ सकता है। बायोमेट्रिक उपस्थिति और रजिस्टर का मिलान मौके पर किया जाएगा।
3. छात्रों का वास्तविक नामांकन बनाम उपस्थिति
कागजों पर छात्रों की संख्या बढ़ाकर दिखाना पुरानी परंपरा रही है, लेकिन अब 'वास्तविक उपस्थिति' का मिलान होगा। यदि रजिस्टर में 50 बच्चे दर्ज हैं और मौके पर 20 मिले, तो प्रधानाध्यापक से लेकर बीएसए तक की जवाबदेही तय होगी।
4. इंफ्रास्ट्रक्चर और लैब की स्थिति
स्कूल की बिल्डिंग जर्जर तो नहीं? क्या प्रयोगशालाओं में धूल जमी है या छात्र वहां प्रयोग कर रहे हैं? सुरक्षा मानकों, खिड़की-दरवाजों और छतों की स्थिति की बारीकी से जांच होगी।
5. बुनियादी सुविधाएं: शौचालय और पेयजल
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत करोड़ों खर्च होने के बाद भी यदि शौचालय गंदे मिले या पीने के पानी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई, तो संबंधित अधिकारी पर गाज गिरना तय है।
6. एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज
सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि खेलकूद, सेमिनार, पेंटिंग और क्विज़ जैसी गतिविधियों पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री यह देखेंगे कि क्या छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय में उत्साह का माहौल है।
7. करियर काउंसलिंग और सेवायोजन
माध्यमिक विद्यालयों के लिए यह बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण है। छात्रों को भविष्य के रोजगार के प्रति जागरूक किया जा रहा है या नहीं, और विद्यालयों में रोजगार परामर्श की क्या स्थिति है, इसकी समीक्षा की जाएगी।
8. शिक्षकों का व्यवहार और फीडबैक
जनता और छात्रों के बीच विभाग की छवि कैसी है? क्या शिक्षक संवेदनशील हैं? सीएम ऑफिस सीधे तौर पर अभिभावकों और छात्रों से शिक्षकों की कर्मठता का फीडबैक ले सकता है।
9. स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का भाव
विद्यार्थियों के बीच आगे बढ़ने की होड़ पैदा करने के लिए क्या विशेष प्रयास किए गए? मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए स्कूल स्तर पर क्या कार्यक्रम हुए, इसकी रिपोर्ट भी तलब की जाएगी।
10. अनुशासन और गाइडलाइंस का पालन
विद्यालय परिसर में अनुशासन और शासन द्वारा जारी की गई विभागीय गाइडलाइंस का अक्षरशः पालन अनिवार्य है। अव्यवस्था मिलने पर तत्काल कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
अधिकारियों को अल्टीमेटम: "धरातल पर उतरें"
अपर मुख्य सचिव ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि निरीक्षण के दौरान कोई भी बहानेबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को दफ्तरों से निकलकर स्कूलों की 'फील्ड मॉनिटरिंग' करने का आदेश दिया है।
"महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पूरी प्रक्रिया की प्रभावी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यदि मुख्यमंत्री के दौरे में किसी जिले की स्थिति खराब पाई गई, तो संबंधित जिले के सर्वोच्च शिक्षा अधिकारी को इसका उत्तरदायी माना जाएगा।"
निष्कर्ष: विभाग के लिए 'अग्निपरीक्षा' का समय
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली 'जीरो टॉलरेंस' वाली रही है। ऐसे में शिक्षा विभाग में मची यह खलबली स्वाभाविक है। पीलीभीत से लेकर लखनऊ तक और गाजियाबाद से लेकर गाजीपुर तक, हर जिले में विद्यालयों की रंगाई-पुताई से लेकर फाइलों को दुरुस्त करने का काम युद्धस्तर पर जारी है।
यह 'स्कैनिंग' अभियान केवल मुख्यमंत्री के दौरे के डर से है या इससे उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में कोई स्थायी सकारात्मक बदलाव आएगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल, शिक्षा विभाग के अफसरों की नींद उड़ी हुई है और वे किसी भी हाल में 'डैमेज कंट्रोल' की कोशिशों में जुटे हैं।

