श्री विजया पुरम: अंडमान और निकोबार प्रशासन के शिक्षा निदेशालय ने सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 के दायरे में आने वाले सभी शिक्षकों के पास TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) या CTET की योग्यता होना अनिवार्य है।
इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इसमें निर्धारित समय सीमा के भीतर योग्यता पूरी न करने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश के मुख्य बिंदु और समय सीमा
शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर (F.no. A-47014/1/2026) के अनुसार, शिक्षकों को उनकी सेवा अवधि के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा गया है:
- 5 वर्ष से कम सेवा वाले शिक्षक: * ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति (Superannuation) में 1 सितंबर 2025 तक 5 वर्ष से कम का समय बचा है, उन्हें TET योग्यता से छूट दी गई है।
- शर्त: वे अपनी सेवानिवृत्ति तक पद पर बने रह सकते हैं, लेकिन बिना TET पास किए उन्हें पदोन्नति (Promotion) नहीं दी जाएगी।
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5 वर्ष से अधिक सेवा वाले शिक्षक:
- जिन शिक्षकों की सेवा 5 वर्ष से अधिक बची है, उनके लिए 1 सितंबर 2027 तक TET/CTET उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
- कार्रवाई: यदि वे इस समय सीमा तक योग्यता हासिल नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें 'अनिवार्य सेवानिवृत्ति' (Compulsory Retirement) दे दी जाएगी। हालांकि, उन्हें नियमानुसार टर्मिनल लाभ (Terminal Benefits) दिए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अनुपालन
यह आदेश सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2025 में दिए गए दो प्रमुख फैसलों के आधार पर जारी किया गया है:
- अंजुमन इशअत-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र (01.09.2025)
- यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन, यूपी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (17.11.2025)
इन फैसलों में कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए NCTE के दिशानिर्देशों के अनुसार शिक्षकों का पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक है।
प्रशासन का निर्देश: तुरंत उठाएं कदम
निदेशालय ने प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों (PST) और स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों (GTT) को सलाह दी है कि वे बिना समय गंवाए आगामी TET/CTET परीक्षाओं की तैयारी शुरू करें।
"सभी संबंधित अधिकारियों (DDOs/HoIs) को निर्देशित किया गया है कि वे परीक्षा में बैठने के इच्छुक शिक्षकों को समय पर आवश्यक अनुमति (NOC) प्रदान करें ताकि योग्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में कोई देरी न हो।" — आदित्य सांगोत्रा (DANICS), शिक्षा निदेशक
निष्कर्ष
अंडमान और निकोबार प्रशासन का यह कड़ा फैसला न केवल शिक्षकों के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि यह शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम भी माना जा रहा है। अब शिक्षकों के पास अपनी नौकरी और पदोन्नति सुरक्षित करने के लिए सितंबर 2027 तक का ही समय शेष है।
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