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UPTET 2026: विज्ञापन की शर्तों ने उलझाया पेंच, क्या 3 लाख डीएलएड प्रशिक्षु टीईटी आवेदन से हो जाएंगे वंचित!

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज: प्रयागराज: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) 2026 का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए यह खबर बेहद अहम है। करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रही इस परीक्षा से जहां युवाओं में उत्साह था, वहीं अब जारी विज्ञापन ने नई बहस और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा जारी पात्रता शर्तों ने खासकर डीएलएड (D.El.Ed) प्रशिक्षुओं को प्रभावित किया है। विज्ञापन में ‘अंतिम वर्ष’ की अनिवार्यता को शामिल किए जाने से प्रदेश के लगभग 3 लाख प्रशिक्षु सीधे तौर पर आवेदन प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं।

UPTET 2026 eligibility controversy D.El.Ed students NCTE vs UP rules comparison

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण में प्रवेश लेते ही अभ्यर्थी टीईटी के लिए पात्र माना जाता है, तो फिर यूपी-टीईटी 2026 में अलग नियम क्यों लागू किए गए हैं? यही कारण है कि यह मामला अब केवल भर्ती तक सीमित नहीं रहकर नियमों की व्याख्या और वैधता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

इस पूरे विवाद को समझने के लिए आइए जानते हैं कि आयोग और NCTE के नियमों में आखिर अंतर क्या है और इसका असर किन अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है।।

क्या है पूरा विवाद?

​विवाद का मुख्य कारण 'प्रवेश' बनाम 'अंतिम वर्ष' का है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा शुक्रवार को जारी विज्ञापन के अनुसार:

  • ​केवल वही अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं जो डीएलएड (बीटीसी), बीएड या डीएड के अंतिम वर्ष में हैं या इसे उत्तीर्ण कर चुके हैं।
  • ​इसका सीधा अर्थ यह है कि प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर (प्रथम वर्ष) के छात्र इस बार टीईटी में शामिल नहीं हो पाएंगे।

एक नज़र में तुलना: आयोग vs NCTE नियम

🔴 आयोग का नियम (UP-TET 2026)

  • केवल Final Year या पास अभ्यर्थी ही आवेदन कर सकते हैं।
  • प्रथम वर्ष (1st & 2nd सेमेस्टर) के छात्र अपात्र
  • पुराने 2011 नियम लागू
  • लाखों छात्र बाहर

🟢 NCTE गाइडलाइन

  • Admission लेते ही TET के लिए पात्रता
  • सभी सेमेस्टर के छात्र योग्य
  • सुप्रीम कोर्ट 2019 + 2022 संशोधन लागू
  • सभी प्रशिक्षुओं को मौका

NCTE के नियमों की अनदेखी का आरोप

​छात्रों और विशेषज्ञों का तर्क है कि यह विज्ञापन राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के वर्तमान नियमों का उल्लंघन करता है।

  • 16 जुलाई 2019 का सुप्रीम कोर्ट आदेश: न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने मात्र से अभ्यर्थी टीईटी के लिए पात्र हो जाता है।
  • 4 अगस्त 2022 का पत्र: एनसीटीई ने साफ किया था कि डीएलएड, बीएड या डीएड में नामांकित कोई भी छात्र (चाहे वह किसी भी सेमेस्टर में हो) टीईटी दे सकता है।
  • ​एनसीटीई ने इसके लिए अपनी 11 फरवरी 2011 की पुरानी अधिसूचना में संशोधन भी कर दिया था।

प्रभावित अभ्यर्थियों की बढ़ती संख्या

​आंकड़ों पर गौर करें तो केवल डीएलएड के प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर के करीब 3 लाख प्रशिक्षु इस विज्ञापन से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। यदि इसमें बीएड और डीएड (विशेष शिक्षा) के प्रथम वर्ष के छात्रों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 5 लाख के पार पहुँच सकती है।

निष्कर्ष:

अगर आयोग NCTE के नियमों के अनुसार बदलाव नहीं करता है, तो यह मुद्दा आगे कानूनी विवाद का रूप ले सकता है और लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

FAQ 🔥

Q1. क्या प्रथम वर्ष के छात्र UPTET 2026 दे सकते हैं?
👉 फिलहाल नहीं, विज्ञापन के अनुसार वे अपात्र हैं।

Q2. NCTE के अनुसार कौन पात्र है?
👉 कोर्स में प्रवेश लेते ही सभी छात्र पात्र माने जाते हैं।

Q3. क्या नियम बदल सकते हैं?
👉 विवाद बढ़ने पर संशोधन संभव है।

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