प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं और वर्तमान में शिक्षण कार्य कर रहे हजारों अध्यापकों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) 2026 के नियमों में आमूल-चूल परिवर्तन करते हुए एक नया 'शुद्धिपत्र' जारी किया है। इस संशोधन के बाद अब वे अभ्यर्थी भी परीक्षा में बैठ सकेंगे, जिन्हें पहले अपात्र मानकर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था। मंगलवार को हुई आयोग की उच्च स्तरीय बैठक में लिए गए इस निर्णय ने प्रदेश के शिक्षा जगत में एक नई लहर पैदा कर दी है।
विवाद और संशोधन की पृष्ठभूमि
आयोग ने 20 मार्च को टीईटी-2026 का आधिकारिक विज्ञापन जारी किया था। हालांकि, विज्ञापन की शर्तों में कुछ ऐसी विसंगतियां थीं, जिनके कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आवेदन करने से वंचित रह गए थे। इस मुद्दे को मीडिया, विशेषकर 'हिन्दुस्तान' अखबार ने प्रमुखता से उठाया था। 'यूपी-टीईटी के आवेदन से तीन लाख डीएलएड प्रशिक्षु बाहर' और 'टीईटी से हजारों सरकारी शिक्षक भी बाहर' जैसी खबरों के प्रकाशित होने के बाद आयोग ने त्वरित संज्ञान लिया। अभ्यर्थियों के बढ़ते दबाव और नियमगत त्रुटियों को देखते हुए मंगलवार को हुई बैठक में विज्ञापन में संशोधन करने का सर्वसम्मत फैसला लिया गया।
डीएलएड प्रशिक्षुओं को मिली बड़ी राहत
संशोधन से पहले के नियमों के अनुसार, केवल वे अभ्यर्थी टीईटी के लिए पात्र थे जो अपने शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (जैसे डीएलएड) के अंतिम वर्ष में थे या उसे उत्तीर्ण कर चुके थे। इस पुरानी शर्त के कारण डीएलएड प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर के लगभग तीन लाख प्रशिक्षु परीक्षा की दौड़ से बाहर हो रहे थे। अब आयोग के उप सचिव डॉ. संजय कुमार सिंह द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, यदि किसी अभ्यर्थी ने शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश ले लिया है या वह किसी भी वर्ष/सेमेस्टर में अध्ययनरत है, तो वह टीईटी के लिए पूरी तरह पात्र माना जाएगा। यह बदलाव नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया गया है।
सेवारत शिक्षकों और विशिष्ट पाठ्यक्रमों के लिए नए प्रावधान
न केवल नए प्रशिक्षु, बल्कि वर्तमान में कार्यरत सहायक अध्यापकों के लिए भी यह संशोधन राहत लेकर आया है। सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशों को आधार बनाते हुए अब सभी सेवारत सहायक अध्यापकों को भी इस पात्रता परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी गई है। इसके साथ ही, उच्च प्राथमिक स्तर (जूनियर हाईस्कूल) की टीईटी में पहले विशिष्ट बीटीसी, बीपीएड, डीपीएड और सीपीएड प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों को बाहर रखा गया था, जिन्हें अब पात्रता की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। इससे उन हजारों शिक्षकों को लाभ होगा जो पदोन्नति या अपनी शैक्षिक योग्यता के उन्नयन के लिए टीईटी देना चाहते हैं।
प्राथमिक स्तर से बीएड का विलोपन
एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव प्राथमिक स्तर की टीईटी की अर्हता को लेकर किया गया है। पूर्व के विज्ञापन में प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए अर्हता संबंधी टिप्पणी में 'बीएड' का उल्लेख किया गया था। कानूनी पेचीदगियों और सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने अब प्राथमिक स्तर की अर्हता सूची से बीएड शब्द को पूरी तरह विलोपित (हटा) कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम पूरी तरह से न्यायालय के आदेशों और वर्तमान शैक्षणिक मानकों के अनुपालन में उठाया गया है।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
इन संशोधनों के बाद यूपी-टीईटी 2026 का दायरा काफी बढ़ गया है। नए प्रावधानों के लागू होने से अब रिकॉर्ड तोड़ आवेदन आने की उम्मीद है। आयोग का यह निर्णय न केवल अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करता है, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में अधिक से अधिक योग्य और पात्र उम्मीदवारों की भागीदारी भी सुनिश्चित करता है। आवेदन की प्रक्रिया को अब इन नए नियमों के साथ अपडेट कर दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक अभ्यर्थी इस महा-परीक्षा का हिस्सा बन सकेंगे।


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