लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे गरीब और अलाभित समूह के बच्चों की शिक्षा को लेकर प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। शासन ने फीस प्रतिपूर्ति और अभिभावकों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता में हो रही लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अपर मुख्य सचिव, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बच्चों की शिक्षा से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि:
- अभिभावकों को सहायता: बच्चों की यूनिफॉर्म, किताबों और अन्य शिक्षण सामग्री के लिए अभिभावकों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता का भुगतान तत्काल किया जाए।
- निजी स्कूलों का भुगतान: स्कूलों द्वारा बच्चों को दी जा रही शिक्षा के बदले शासन से मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि (Fee Reimbursement) को बिना देरी जारी किया जाए।
- समय सीमा: यह पूरी प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर संपन्न कर शासन को रिपोर्ट भेजी जाए।
दरअसल, प्रदेश के हजारों निजी स्कूलों में आरटीई के तहत 25% सीटों पर गरीब बच्चों का प्रवेश लिया गया है। नियमों के मुताबिक, इन बच्चों की फीस का वहन राज्य सरकार करती है। पिछले कुछ समय से कई जिलों में यह भुगतान लंबित होने की शिकायतें मिल रही थीं, जिससे न केवल स्कूलों को प्रबंधन में दिक्कत आ रही थी, बल्कि अभिभावकों को भी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
अपर मुख्य सचिव ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा (एक सप्ताह) के भीतर धनराशि का हस्तांतरण नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। शासन का मानना है कि इस देरी से योजना की मंशा प्रभावित हो रही है और गरीब बच्चों की पढ़ाई में बाधा आ सकती है।


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