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यूपी के 20,000 आंगनबाड़ी केंद्र अब बनेंगे 'स्मार्ट लर्निंग हब', प्रत्येक चयनित आंगनबाड़ी केंद्र को ₹39,000 की वित्तीय सहायता

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश की प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के 20,000 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक 'लर्निंग हब' के रूप में विकसित किया जा रहा है। अब ये केंद्र केवल पुष्टाहार वितरण तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नन्हे-मुन्नों के बौद्धिक विकास की पहली पाठशाला बनेंगे।

UP Anganwadi Center Learning Hub Image

शिक्षा को मिला ₹39,000 की वित्तीय मदद का आधार

​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विजन को धरातल पर उतारते हुए, सरकार प्रत्येक चयनित आंगनबाड़ी केंद्र को ₹39,000 की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। इस राशि का मुख्य उद्देश्य केंद्रों को अत्याधुनिक ECCE (Early Childhood Care and Education) किट से लैस करना है।

किट में शामिल प्रमुख संसाधन:

  • पहल मैनुअल व कैलेंडर: व्यवस्थित पढ़ाई के लिए वार्षिक गतिविधि कैलेंडर और ईसीसीई मैनुअल।
  • एनबीटी की कहानियां: नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) द्वारा प्रकाशित 6 चुनिंदा कहानी पुस्तकों का सेट, जो बच्चों की कल्पनाशक्ति को पंख देगा।
  • टीएलएम सामग्री: शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए विशेष 'टीचिंग लर्निंग मैटेरियल' (TLM) पुस्तिकाएं।

खेल-खेल में 'अक्षर' और 'संख्या' का ज्ञान

​3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए शिक्षा को अब बोझ के बजाय आनंदमयी बनाया गया है। वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित इन किट्स के माध्यम से बच्चों को निम्नलिखित लाभ मिल रहे हैं:

  1. वैज्ञानिक पद्धति: रंगीन चार्ट, पहेलियों और शैक्षिक खिलौनों के जरिए खेल-खेल में अक्षर व संख्या पहचान।
  2. सर्वांगीण विकास: बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के साथ-साथ उनके सामाजिक व्यवहार और जिज्ञासा को बढ़ाने पर जोर।
  3. एकीकृत मॉडल: एक ही छत के नीचे बच्चों को बेहतर पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच और गुणवत्तापूर्ण प्री-स्कूल शिक्षा दी जा रही है।

बदल रहा है आंगनबाड़ी केंद्रों का स्वरूप

​कभी केवल 'पोषण केंद्र' माने जाने वाले आंगनबाड़ी केंद्र अब 'स्मार्ट लर्निंग हब' की पहचान बना रहे हैं। अत्याधुनिक उपकरणों, बेहतर फर्नीचर और प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी अब कॉन्वेंट स्कूलों जैसी बुनियादी शिक्षा मिल सकेगी। यह पहल न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें भविष्य की प्रतिस्पर्धी शिक्षा के लिए भी तैयार करेगी।

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