बाराबंकी। अक्सर कहा जाता है कि अगर मन में दृढ़ संकल्प और मेहनत करने का जज्बा हो, तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता। इस बात को सच कर दिखाया है बाराबंकी के एक साधारण परिवार के लाल अनुपम कुमार वर्मा ने। अनुपम ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित होकर न केवल अपने जिले का, बल्कि पूरे प्रदेश के शिक्षामित्र समाज का नाम रोशन किया है।
छठे प्रयास में हासिल किया मुकाम
अनुपम की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। इसके पीछे वर्षों का कड़ा संघर्ष और धैर्य छिपा है। उन्होंने अपने छठे प्रयास में यह गौरव हासिल किया। गौरतलब है कि साल 2022 में वह यूपीएससी के इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन अंतिम चयन से चूक गए थे। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और उसी साल उनका चयन पीसीएस (PCS) में हो गया। वर्तमान में अनुपम अयोध्या जिले की सोहावल तहसील में खंड विकास अधिकारी (BDO) के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन उनका सपना आईएएस बनने का था, जिसे उन्होंने अपनी निरंतरता से पूरा कर दिखाया।
मां शिक्षामित्र और पिता किसान
अनुपम एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं। उनकी माता पूनम वर्मा बाराबंकी के बंकी ब्लॉक के बनियातारा प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र के पद पर तैनात हैं। उनके पिता सुरेंद्र सिंह गांव में रहकर खेती-किसानी करते हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में जगह बनाना उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखते हैं।
प्रारंभिक शिक्षा और शैक्षणिक सफर
अनुपम की शुरुआती शिक्षा बाराबंकी के बाबा गुरुकुल एकेडमी से हुई, जहाँ से उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट किया। इसके बाद उन्होंने साल 2019 में लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री प्राप्त की। स्नातक के बाद से ही वह पूरी तरह से सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए थे।
बेसिक शिक्षा परिवार में खुशी की लहर
अनुपम की इस उपलब्धि पर बेसिक शिक्षा विभाग और शिक्षामित्रों में भारी उत्साह है। शिक्षामित्रों का कहना है कि पूनम वर्मा के बेटे की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती। सोशल मीडिया पर भी अनुपम को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
अनुपम वर्मा की यह सफलता दर्शाती है कि असफलताएं केवल एक पड़ाव हैं, मंजिल नहीं। यदि आप अपनी गलतियों से सीखकर आगे बढ़ते हैं, तो सफलता निश्चित ही आपके कदम चूमती है। उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए 'सर जी की पाठशाला' की ओर से ढेरों शुभकामनाएं!

