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यूपी में 65,000 आंगनबाड़ी पदों पर भर्ती का रास्ता साफ, मुख्यमंत्री ने की मानदेय बढ़ाने की घोषणा

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ | विशेष संवाददाता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की महिलाओं के स्वावलंबन और बाल विकास पुष्टाहार विभाग को नई दिशा देने के लिए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। लखनऊ के लोक भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इसी वर्ष कुल 65,000 रिक्त पदों पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण करेगी। इस बड़ी घोषणा के तहत 60 हजार सहायिकाओं और 5 हजार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को नौकरी दी जाएगी, जिसकी चयन प्रक्रिया वर्तमान में शासन स्तर पर गतिमान है।

CM Yogi Adityanath UP Anganwadi Bharti 2026 News

​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम के दौरान तकनीक और बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया। उन्होंने डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 69,804 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन वितरित किए। इसके साथ ही बच्चों के पोषण स्तर की सटीक निगरानी सुनिश्चित करने के लिए दो लाख से अधिक ग्रोथ मॉनीटरिंग डिवाइस भी प्रदान की गईं। इस अवसर पर 18,440 नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र सौंपे गए, जिससे विभाग के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी आई है।

​आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर उनके मानदेय को लेकर आई है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि जल्द ही एक भव्य कार्यक्रम आयोजित कर बढ़े हुए मानदेय की सौगात दी जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मानदेय में न केवल सम्मानजनक वृद्धि होगी, बल्कि इसके साथ न्यूनतम मानदेय की गारंटी भी सुनिश्चित की जाएगी। आउटसोर्सिंग कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने एक विशेष निगम का गठन किया है, ताकि किसी भी स्तर पर उनका शोषण न हो सके। आगामी अप्रैल माह से सभी विभागों के आउटसोर्सिंग कर्मियों को बढ़ा हुआ मानदेय मिलना शुरू हो जाएगा।

​प्रदेश में सुविधाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री ने 450 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 3,170 आंगनबाड़ी भवनों और 140 बाल विकास परियोजना कार्यालय भवनों का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम राज्य में बाल विकास सेवाओं को आधुनिक बनाने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं की आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार लाएगा। इस पहल से न केवल रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई को भी एक नई ऊर्जा और शक्ति मिलेगी।