लखनऊ। उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 सहायक अध्यापक भर्ती का विवाद एक बार फिर गहरा गया है। सोमवार को राजधानी लखनऊ में नियुक्ति की मांग को लेकर सैकड़ों अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा निदेशालय (निशातगंज) का घेराव किया। आरक्षित वर्ग के इन अभ्यर्थियों का आरोप है कि अदालती आदेशों और सरकार के आश्वासनों के बावजूद उन्हें अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिले हैं।
निदेशालय पर भारी हंगामा और घेराबंदी
सुबह से ही अभ्यर्थियों की भीड़ निदेशालय परिसर में जुटने लगी थी। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि विभागीय अधिकारी केवल आश्वासन का खेल खेल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील केवल नई तारीख (Next Date) लेने का काम करते हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थी सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं।
पुलिस की कार्रवाई और अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी
दोपहर तक चले भारी विरोध प्रदर्शन के बाद जब अभ्यर्थी टस से मस नहीं हुए, तो पुलिस प्रशासन ने मोर्चा संभाला। बेसिक शिक्षा निदेशक से वार्ता विफल होने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन हिरासत में लेना शुरू कर दिया। बसों में भरकर अभ्यर्थियों को इको गार्डन धरना स्थल भेज दिया गया। इस दौरान अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
प्रमुख मांगें और आगामी रणनीति
प्रदर्शन के दौरान पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा की बैठक भी हुई, जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया:
- 19 मार्च की सुनवाई: अभ्यर्थियों ने मांग की है कि आगामी 19 मार्च को होने वाली सुनवाई में प्रदेश सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी की जाए ताकि स्टे हट सके।
- याची लाभ की मांग: अभ्यर्थियों ने मांग की है कि यदि पूरी सूची पर निर्णय में देरी हो रही है, तो कम से कम याची लाभ (Petitioner Benefit) देकर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए।
- अन्य भर्तियों का साथ: इस प्रदर्शन को 29334 गणित-विज्ञान शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का भी समर्थन मिला, जो लंबे समय से अपनी काउंसिलिंग और नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की विसंगतियों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने 6800 अभ्यर्थियों की एक अतिरिक्त सूची जारी की थी, लेकिन यह मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट में प्रभावी पैरवी न होने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है, जिससे हजारों परिवारों का भविष्य दांव पर लगा है।


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