शिक्षा जगत में इन दिनों 2017 के आरटीई (RTE) संशोधन और TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर काफी बहस छिड़ी हुई है। सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर यह दावा किया जा रहा है कि 2017 के संशोधन के बाद हर कार्यरत शिक्षक के लिए TET अनिवार्य हो गया है। लेकिन क्या कानूनन यह सच है?
आइए, इस मामले के तकनीकी और कानूनी पहलुओं को बारीकी से समझते हैं।
वर्ष 2017 के संशोधन की शब्दावली: 'न्यूनतम योग्यता' बनाम 'TET'
2017 के संशोधन में जिस मुख्य पंक्ति का उल्लेख है, वह इस प्रकार है: "Provided further that every teacher appointed or in position as on the 31st March, 2015, who does not possess 'minimum qualifications' as laid down under..."
यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि कानून "मिनिमम क्वालिफिकेशन" (न्यूनतम योग्यता) को पूर्ण करने की बात करता है, न कि सीधे तौर पर "TET" की। कानूनी व्याख्या के अनुसार, न्यूनतम योग्यता और पात्रता परीक्षा (Eligibility Test) दो अलग-अलग चीजें हैं।
NCTE का हलफनामा और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
शिवकुमार पाठक बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के प्रसिद्ध मामले में, NCTE (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट की थी।
- स्पष्टीकरण: NCTE ने माना था कि TET कोई 'क्वालिफिकेशन' (शैक्षणिक योग्यता) नहीं है, बल्कि यह केवल एक 'अहर्यता' (Eligibility) है।
- निष्कर्ष: यदि TET क्वालिफिकेशन नहीं है, तो 2017 के संशोधन में प्रयुक्त "मिनिमम क्वालिफिकेशन" शब्द का अर्थ प्रोफेशनल कोर्स (जैसे B.Ed, D.El.Ed या BTC) से है, न कि TET से।
प्रोफेशनल कोर्स की समय सीमा
2017 के संशोधन का वास्तविक उद्देश्य उन शिक्षकों को एक अंतिम अवसर देना था, जिन्होंने अपनी प्रोफेशनल ट्रेनिंग (जैसे बी.एड. या डी.एल.एड.) पूरी नहीं की थी। इसी के मद्देनजर शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों को नोटिस जारी कर सभी अप्रशिक्षित शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना प्रोफेशनल कोर्स पूरा करने के निर्देश दिए थे।
मुख्य निष्कर्ष (Key Takeaways)
- धारा 23(1): इसमें वर्णित "न्यूनतम योग्यता" का सीधा संबंध प्रोफेशनल डिग्री/डिप्लोमा से है।
- भ्रम की स्थिति: 2017 के संशोधन को TET से जोड़कर देखना कानूनी दृष्टि से त्रुटिपूर्ण प्रतीत होता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में स्वयं नियामक संस्था (NCTE) ने इन्हें अलग माना है।
- लागू होना: यह संशोधन मुख्य रूप से उन शिक्षकों के लिए था जो 31 मार्च 2015 तक कार्यरत थे लेकिन जिनके पास अनिवार्य प्रोफेशनल डिग्री नहीं थी।
साभार: राजेश सिंह टोनी (फेसबुक पोस्ट) एवं विधिक विमर्श।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
यहाँ कुछ प्रमुख सवालों के जवाब दिए गए हैं जो शिक्षकों और अभ्यर्थियों के मन में अक्सर उठते हैं:
प्रश्न 1: क्या 2017 का आरटीई (RTE) संशोधन केवल TET के लिए था? उत्तर: नहीं। 2017 के संशोधन का मुख्य उद्देश्य उन शिक्षकों को "न्यूनतम योग्यता" (Professional Course जैसे B.Ed/D.El.Ed) पूर्ण करने का अवसर देना था, जो 31 मार्च 2015 तक सेवा में थे लेकिन अप्रशिक्षित थे।
प्रश्न 2: 'न्यूनतम योग्यता' (Minimum Qualification) और 'TET' में क्या अंतर है? उत्तर: कानूनी रूप से, न्यूनतम योग्यता का अर्थ आपके प्रोफेशनल कोर्स (डिग्री/डिप्लोमा) से है। वहीं, TET एक 'पात्रता परीक्षा' (Eligibility Test) है। NCTE ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि TET एक अहर्यता है, शैक्षणिक योग्यता (Qualification) नहीं।
प्रश्न 3: क्या पुराने नियुक्त शिक्षकों के लिए भी TET अनिवार्य है? उत्तर: 2017 के संशोधन की तकनीकी व्याख्या के अनुसार, यह 'मिनिमम क्वालिफिकेशन' (प्रोफेशनल ट्रेनिंग) को पूरा करने पर जोर देता है। पुराने नियुक्त शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता को लेकर विभिन्न अदालतों के अलग-अलग संदर्भ हैं, लेकिन "योग्यता" शब्द यहाँ प्रोफेशनल कोर्स के लिए प्रयुक्त हुआ है।
प्रश्न 4: NCTE ने शिवकुमार पाठक केस में क्या कहा था? उत्तर: NCTE ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया था कि TET केवल एक पात्रता परीक्षा है। इसका उद्देश्य शिक्षक भर्ती के लिए एक मानक तय करना है, लेकिन इसे मूल 'प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन' के बराबर नहीं माना जा सकता।
प्रश्न 5: शिक्षा मंत्रालय के नोटिस का मुख्य केंद्र क्या था? उत्तर: शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया था कि वे अपने सभी अप्रशिक्षित शिक्षकों को चिन्हित करें और उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर D.El.Ed या समकक्ष प्रोफेशनल कोर्स पूरा करवाएं।


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