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सत्र 2026–27 में कक्षा 1 के लिए स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम की पूरी जानकारी, उद्देश्य, समय-सारिणी, गतिविधियाँ और शिक्षकों की भूमिका

Sir Ji Ki Pathshala

शैक्षिक सत्र 2026–27 में कक्षा–1 के लिए स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत प्रारम्भिक बाल्यावस्था शिक्षा (Early Childhood Care and Education – ECCE) को विशेष महत्व दिया गया है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए कक्षा–1 में प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया है। यह कार्यक्रम बच्चों को विद्यालयी वातावरण से परिचित कराने तथा औपचारिक शिक्षा के लिए मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक रूप से तैयार करने में सहायक है।

School Readiness Program Class 1 Session 2026-27

उत्तर प्रदेश में यह कार्यक्रम गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इसमें बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर दिया जाता है, जिससे वे भाषा, गणित तथा सामाजिक कौशल के प्रारम्भिक स्तर को आसानी से समझ सकें। शैक्षिक सत्र 2026–27 में यह कार्यक्रम कक्षा–1 के विद्यार्थियों के लिए लगभग 12 सप्ताह की गतिविधि आधारित योजना के रूप में लागू किया जा रहा है।


कार्यक्रम की पृष्ठभूमि

पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया कि विद्यालय में प्रवेश लेने वाले कई बच्चे औपचारिक शिक्षा के लिए पूर्णतः तैयार नहीं होते। उन्हें विद्यालय के वातावरण, अनुशासन, पाठ्य सामग्री और शिक्षण पद्धति के साथ तालमेल बैठाने में कठिनाई होती है।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम की शुरुआत की गई। यह कार्यक्रम बच्चों को धीरे-धीरे विद्यालयी वातावरण के अनुकूल बनाता है। इसके माध्यम से बच्चों को भाषा, संख्यात्मक ज्ञान, सामाजिक व्यवहार तथा रचनात्मक गतिविधियों से परिचित कराया जाता है।


कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य

स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उन्हें विद्यालय जीवन के लिए तैयार करना है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—

  1. बच्चों को विद्यालय के वातावरण से परिचित कराना।
  2. प्रारम्भिक भाषा कौशल का विकास करना।
  3. संख्यात्मक समझ एवं प्रारम्भिक गणितीय अवधारणाओं का विकास करना।
  4. बच्चों में आत्मविश्वास एवं सामाजिक व्यवहार विकसित करना।
  5. खेल, कहानी, गीत और चित्रकला जैसी गतिविधियों के माध्यम से सीखने की रुचि बढ़ाना।
  6. बच्चों में रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति को विकसित करना।
  7. अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना।

कार्यक्रम की समयसारिणी

शैक्षिक सत्र 2026–27 में स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम 12 सप्ताह तक संचालित किया जाएगा। इसकी समयसारिणी इस प्रकार है—

प्रारम्भिक चरण (1 अप्रैल – 18 अप्रैल)

इस अवधि में कक्षा–1 में बच्चों का प्रवेश एवं नामांकन किया जाएगा। साथ ही अभिभावकों का उन्मुखीकरण (Orientation) किया जाएगा, ताकि वे कार्यक्रम के उद्देश्य और गतिविधियों को समझ सकें।

गतिविधि आधारित शिक्षण (20 अप्रैल – 20 मई)

इस अवधि में गतिविधि आधारित शिक्षण की शुरुआत की जाएगी। बच्चों को खेल, कहानी, गीत, चित्रकला और अन्य रोचक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जाएगा।

मध्य चरण (22 जून – अगस्त के द्वितीय सप्ताह तक)

इस चरण में गतिविधि कैलेंडर के अनुसार नियमित रूप से शिक्षण कार्य किया जाएगा। बच्चों की भाषा और गणितीय समझ को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ कराई जाएँगी।

समापन चरण (अगस्त के अंतिम सप्ताह – सितम्बर के प्रथम सप्ताह तक)

कार्यक्रम के अंत में बच्चों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा और अभिभावकों के साथ बैठक आयोजित कर उन्हें बच्चों के विकास की जानकारी दी जाएगी।


विद्यालय के प्रधानाध्यापक की भूमिका

विद्यालय के प्रधानाध्यापक इस कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी मुख्य जिम्मेदारियाँ निम्नलिखित हैं—

  • विद्यालय में आवश्यक शिक्षण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • कक्षा–1 के लिए नोडल शिक्षक का चयन करना।
  • गतिविधि कैलेंडर और दिशा-निर्देशों को डाउनलोड कर शिक्षकों को उपलब्ध कराना।
  • बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।
  • अभिभावकों के साथ बैठक आयोजित कर उन्हें कार्यक्रम की जानकारी देना।

नोडल शिक्षक की भूमिका

नोडल शिक्षक इस कार्यक्रम के संचालन में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उनकी जिम्मेदारियाँ निम्नलिखित हैं—

  • निर्धारित समयावधि में प्रशिक्षण एवं प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम पूरा करना।
  • गतिविधि कैलेंडर के अनुसार कक्षा में शिक्षण कार्य कराना।
  • स्थानीय सामग्री का उपयोग कर टीएलएम (Teaching Learning Material) तैयार करना।
  • बच्चों की गतिविधि आधारित शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाना।
  • प्रत्येक सप्ताह बच्चों की प्रगति का आकलन करना।

नोडल शिक्षक संकुल की भूमिका

नोडल शिक्षक संकुल का कार्य कार्यक्रम के संचालन में सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करना है। वे समय-समय पर बैठक आयोजित कर कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करते हैं और आवश्यक सुझाव प्रदान करते हैं।


अभिभावकों की सहभागिता

स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम की सफलता में अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यालय द्वारा अभिभावकों को कार्यक्रम के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है और उनसे अनुरोध किया जाता है कि वे बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें।

अभिभावकों को यह भी बताया जाता है कि वे घर पर बच्चों के साथ बातचीत, कहानी सुनाना, चित्र बनवाना और खेल-खेल में सीखने की गतिविधियाँ कराकर उनके सीखने में सहयोग कर सकते हैं।


गतिविधि आधारित शिक्षण की विशेषताएँ

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर दिया जाता है। इसमें निम्नलिखित गतिविधियाँ शामिल होती हैं—

  • गीत और कविता
  • कहानी सुनाना और सुनना
  • चित्रकला और रंग भरना
  • समूह खेल
  • रोल प्ले (भूमिका अभिनय)
  • हस्तकला और रचनात्मक गतिविधियाँ

इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में भाषा, गणित और सामाजिक कौशल का विकास होता है।


कार्यक्रम का महत्व

स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम बच्चों को विद्यालय जीवन के लिए तैयार करता है। इसके माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है, सीखने की रुचि विकसित होती है और वे विद्यालय के वातावरण में सहज महसूस करते हैं।

यह कार्यक्रम बच्चों की आधारभूत शिक्षा को मजबूत बनाता है और आगे की पढ़ाई के लिए मजबूत नींव तैयार करता है।


निष्कर्ष

कक्षा–1 के लिए स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम प्रारम्भिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि विद्यालय, शिक्षक और अभिभावक मिलकर इस कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं, तो यह बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को सीखने का आनंददायक वातावरण मिलता है, जिससे वे विद्यालयी जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करते हैं और अपने भविष्य की मजबूत नींव रखते हैं।


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