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पितृत्व अवकाश (Paternity Leave): अब पिता भी निभाएंगे परवरिश में बराबर की जिम्मेदारी, सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को बड़ी सलाह

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली: बच्चों के पालन-पोषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और प्रगतिशील टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि बच्चे की देखभाल केवल मां का कर्तव्य नहीं है, बल्कि इसमें पिता की भूमिका भी उतनी ही अनिवार्य है। इसी के मद्देनजर कोर्ट ने केंद्र सरकार को 'पितृत्व अवकाश' (Paternity Leave) पर ठोस कानून बनाने का सुझाव दिया है।

Supreme Court Paternity Leave Decision 2026 Hindi News

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु

​अदालत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं, जो भविष्य में कामकाजी पिताओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं:

  • समान जिम्मेदारी: कोर्ट ने कहा कि पालन-पोषण में मां केंद्रीय भूमिका में होती है, लेकिन पिता का साथ न केवल बच्चे के भावनात्मक विकास के लिए जरूरी है, बल्कि यह मां को भी आवश्यक सहयोग प्रदान करता है।
  • गोद लेने वाले माता-पिता के लिए राहत: अदालत ने उस पुराने नियम को असंवैधानिक करार दिया जो केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर मातृत्व अवकाश की अनुमति देता था। अब गोद लेने वाली मां को 12 हफ्ते का अवकाश मिलेगा, चाहे बच्चे की उम्र कुछ भी हो।
  • भावनात्मक जुड़ाव (Bonding): जीवन के शुरुआती महीने और साल बच्चे के भविष्य की नींव होते हैं। पिता की मौजूदगी इस दौरान बच्चे और पिता के बीच के संबंध को मजबूत करती है।

पितृत्व अवकाश कानून की आवश्यकता क्यों?

​सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इसे 'सामाजिक सुरक्षा लाभ' के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया है। इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  1. लैंगिक समानता (Gender Equality): जब पिता को अवकाश मिलेगा, तो समाज की यह पारंपरिक सोच बदलेगी कि घर और बच्चे केवल महिलाओं की जिम्मेदारी हैं।
  2. पारिवारिक संतुलन: कार्यस्थल और घर के बीच पिता बेहतर संतुलन बना पाएंगे और परिवार को मजबूती मिलेगी।
  3. बच्चे का सर्वांगीण विकास: पिता की सक्रिय भागीदारी से बच्चे का मानसिक और भावनात्मक विकास बेहतर होता है।

बेसिक शिक्षा और शिक्षकों पर प्रभाव

​उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों और बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के बीच भी इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। शिक्षकों की मांग है कि पितृत्व अवकाश को उनके अधिकार के रूप में शामिल किया जाए ताकि वे भी अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को कुशलतापूर्वक निभा सकें।

"पितृत्व अवकाश से न केवल पिता को बच्चे के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा, बल्कि यह कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रति भेदभाव को कम करने में भी सहायक होगा।" — अदालत की टिप्पणी


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