खुलेंगे खुशियों के द्वार: नवारम्भ उत्सव के जरिए परिषदीय विद्यालयों में प्री-प्राइमरी शिक्षा का आगाज़, स्कूलों में मनाया जाएगा बालवाटिका प्रवेश उत्सव
उत्तर प्रदेश सरकार के महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुपालन में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश के को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों को 'बालवाटिका' के रूप में सशक्त बनाना और बच्चों के नामांकन में वृद्धि करना है।
आयोजन की पृष्ठभूमि और आवश्यकता
- लक्ष्य 2030: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार, वर्ष 2030 तक पूर्व-प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण किया जाना अनिवार्य है।
- नामांकन की स्थिति: एसर (ASER) 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 3-4 वर्ष के लगभग 50% बच्चे अभी भी प्री-स्कूल (आंगनबाड़ी/बालवाटिका) में नामांकित नहीं हैं।
- विशेष तिथि: इस अंतर को पाटने के लिए 25 मार्च 2026 को समस्त प्राथमिक एवं कम्पोजिट विद्यालयों में 'नवारम्भ उत्सव' का आयोजन एक साथ किया जाएगा।
उत्सव के मुख्य उद्देश्य
- अनौपचारिक शिक्षा का आरंभ: 3-4 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को बालवाटिका में प्रवेश दिलाकर उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।
- कक्षा-1 में प्रवेश: 5-6 वर्ष के बच्चे जो 6 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें औपचारिक शिक्षा की प्रथम कक्षा में प्रवेश दिलाना।
- सामुदायिक जुड़ाव: अभिभावकों और समुदाय को विद्यालय की गतिविधियों और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के महत्व से जोड़ना।
कार्यक्रम की रूपरेखा (Minute-to-Minute)
उत्सव का आयोजन एक निश्चित समय-सारणी के अनुसार किया जाएगा:
- शुभारंभ: मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना (15 मिनट)
- उद्देश्य प्रस्तुतीकरण: प्रधानाध्यापक द्वारा कार्यक्रम के लक्ष्यों की जानकारी (15 मिनट)
- चर्चा: पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के महत्व पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण (30 मिनट)
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: बालवाटिका के बच्चों द्वारा प्रस्तुतियाँ (40 मिनट)
- नामांकन प्रक्रिया: 6 वर्ष पूर्ण करने वाले बच्चों की सूची प्रधानाध्यापक को सौंपना (10 मिनट)
- भ्रमण: उपस्थित प्रतिनिधियों द्वारा 'क्रियाशील बालवाटिका' और लर्निंग कॉर्नर का अवलोकन (30 मिनट)
प्रमुख हितधारकों के उत्तरदायित्व
सफल आयोजन के लिए विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियाँ तय की गई हैं:
- प्रधानाध्यापक: उत्सव के लिए बैनर, साज-सज्जा, रेत लेखन सामग्री और अभिभावकों के लिए सूक्ष्म जलपान की व्यवस्था करना।
- आंगनबाड़ी कार्यकत्री: 3-6 वर्ष के बच्चों का चिन्हांकन करना और समुदाय से संपर्क कर अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
- खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO): विकास खण्ड स्तर पर बैठकें आयोजित करना और कम से कम दो विद्यालयों में स्वयं प्रतिभाग करना।
- एआरपी (ARP): प्रेरणा पोर्टल पर कार्यक्रम की फोटोग्राफ और आख्या अपलोड करना।
वित्तीय एवं प्रचार-प्रसार नियम
- बजट: प्रत्येक विद्यालय को इस उत्सव हेतु 3000 रुपये की लिमिट जारी की गई है।
- व्यय के नियम: इस धनराशि से बैनर-पोस्टर के अलावा 3-4 वर्ष के बच्चों के लिए बिल्डिंग ब्लॉक्स, पजल या खेल सामग्री (प्रति बच्चा अधिकतम 50 रुपये) खरीदी जाएगी।
- प्रचार: हस्तनिर्मित आमंत्रण पत्र वितरित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक माताएं और अभिभावक इसमें भाग ले सकें।
अनुश्रवण और रिपोर्टिंग
कार्यक्रम की सफलता की समीक्षा राज्य स्तर पर की जाएगी। सभी विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे कार्यक्रम की संक्षिप्त आख्या और फोटोग्राफ सुरक्षित रखें और इसे संबंधित नोडल अधिकारियों को उपलब्ध कराएं।
यह उत्सव उत्तर प्रदेश के बुनियादी शिक्षा ढांचे में सुधार और बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक 'नवारम्भ' है।
आदेश की PDF डाउनलोड करें


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