लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन के कार्मिक विभाग ने प्रदेश के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में, राज्य में 02 अप्रैल से 08 अप्रैल, 2026 तक 'मिशन कर्मयोगी साधना सप्ताह' मनाने का निर्णय लिया गया है।
प्रमुख सचिव, एम० देवराज द्वारा जारी इस आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस सप्ताह का मुख्य उद्देश्य 'क्षमता विकास आयोग' (Capacity Building Commission) के पांचवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सरकारी तंत्र की कार्यकुशलता को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं
शासन द्वारा इस साधना सप्ताह के सफल क्रियान्वयन के लिए तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया गया है:
- डिजिटल लर्निंग पर जोर: प्रदेश के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर कम से कम 4 घंटे का 'भूमिका अनुरूप प्रशिक्षण' (Role-aligned learning) पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसमें विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नवीनतम मार्केटप्लेस पाठ्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- सामूहिक चर्चा और कार्यशालाएं: विभिन्न विभागों को अपने क्षेत्र की चुनौतियों, सुधार की प्राथमिकताओं और 'बेस्ट प्रैक्टिसेज' पर विचार-विमर्श करने के लिए वेबिनार, पैनल चर्चा और 'सहकर्मी शिक्षण' (Peer Learning) सत्र आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- प्रशिक्षण संस्थानों की सक्रियता: राज्य के प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (ATIs) इस दौरान विशिष्ट कार्यशालाएं और भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) से जुड़े सत्र संचालित करेंगे।
इस अभियान का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि सरकारी सेवा में तकनीक और आधुनिक प्रबंधन कौशल का समावेश करना है। शासन ने सभी अपर मुख्य सचिवों, सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपने स्तर से इस कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करें ताकि जनसेवा के कार्यों में और अधिक पारदर्शिता और गतिशीलता आ सके।


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