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सोने की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट: 40 साल का रिकॉर्ड टूटा, ₹9,050 सस्ता हुआ सोना

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली, एजेंसी वैश्विक बाजार में आई उथल-पुथल के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में भारी 'सुनामी' देखने को मिली। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 9,050 रुपये की बड़ी गिरावट के साथ चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस गिरावट ने पिछले 40 वर्षों के साप्ताहिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।

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​बाजार का ताजा हाल

​ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना लगभग 6 प्रतिशत गिरकर अब 1,43,600 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर सहित) पर आ गया है। शुक्रवार को यही सोना 1,52,650 रुपये पर बंद हुआ था।

​वहीं, चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। चांदी 4.36 प्रतिशत लुढ़ककर 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई है, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,40,500 रुपये पर थी।

​गिरावट के मुख्य कारण

​बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस बड़ी गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां जिम्मेदार हैं:

  • पश्चिम एशिया में तनाव: खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है।
  • डॉलर की मजबूती: चूंकि कच्चे तेल का अधिकांश व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की मांग बढ़ने से वह महंगा हुआ है, जिसका सीधा दबाव सोने की कीमतों पर पड़ा।
  • वैश्विक बिकवाली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 227.42 डॉलर (5.06%) टूटकर 4,263.73 डॉलर प्रति औंस रह गया है।
विशेष तथ्य: पिछले सप्ताह सोने की कीमतों में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जो चार दशक से अधिक की सबसे खराब साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई है।

    ​भारतीय घरों में 'कुबेर का खजाना'

    ​आईएमएफ (IMF) के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीयों का सोने के प्रति प्रेम पूरी दुनिया में बेमिसाल है। रिपोर्ट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:

    • कुल भंडार: भारतीय घरों में अनुमानित 34,600 टन से अधिक सोना जमा है।
    • कुल मूल्य: इसकी वर्तमान वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (450 लाख करोड़ रुपये से अधिक) है।
    • जीडीपी से तुलना: यह विशाल भंडार भारत की कुल जीडीपी से 125 प्रतिशत अधिक है।

    ​सोने की कीमतों में आई यह कमी उन लोगों के लिए एक बड़ा अवसर हो सकती है जो निवेश या शादी-ब्याह के लिए खरीदारी की योजना बना रहे थे। हालांकि, बाजार की मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए निवेशक फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।

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