रायपुर: छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में उस वक्त हड़कंप मच गया जब हाल ही में आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET-2026) के परिणाम घोषित हुए। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद राज्य के सरकारी स्कूलों में वर्षों से सेवा दे रहे हजारों शिक्षकों की कुर्सी पर अब संकट मंडरा रहा है। अनिवार्य की गई इस परीक्षा में सिर्फ 8 प्रतिशत शिक्षक ही सफल हो पाए हैं, जबकि लगभग 75 हजार शिक्षक पात्रता हासिल करने में विफल रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 के अपने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया था कि देश के सभी सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों के लिए TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। बिना इस पात्रता के न तो नौकरी सुरक्षित रहेगी और न ही भविष्य में पदोन्नति मिल सकेगी। इसी आदेश के पालन में छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने परीक्षा आयोजित की थी।
निराशाजनक परिणाम और आंकड़ों की स्थिति
परीक्षा के परिणाम बताते हैं कि अनुभवी शिक्षकों के लिए वर्तमान पाठ्यक्रम की डगर बेहद कठिन रही। प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-5) में 1,02,506 परीक्षार्थियों में से केवल 19,292 ही सफल हुए, जबकि उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6-8) में 1,82,384 में से मात्र 36,377 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हो सके। कुल मिलाकर कार्यरत शिक्षकों में से लगभग 92 प्रतिशत इस 'अग्निपरीक्षा' में असफल रहे हैं।
शिक्षक संगठनों का आक्रोश: "भविष्य के साथ खिलवाड़"
शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष राजनारायण द्विवेदी और टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने इस परीक्षा को शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है। संगठनों का तर्क है कि जो शिक्षक दशकों से पढ़ा रहे हैं, उन पर अचानक इतना कठिन और नया पाठ्यक्रम थोपना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने मांग की है कि अनुभवी शिक्षकों के लिए एक 'सीमित विभागीय परीक्षा' आयोजित की जाए जिसका स्तर अलग हो। यदि नियमों में रियायत नहीं दी गई, तो प्रदेश के हजारों शिक्षक 4 अप्रैल को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन करेंगे।
सरकार का पक्ष और अगली रणनीति
स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार, शिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य है, हालांकि विभाग अब समाधान के रास्ते तलाश रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) अब एक्शन मोड में आ गया है। विभाग ने सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों से शिक्षकों का आयुवार और श्रेणीवार डेटा मांगा है। इस डेटा के आधार पर एक नई कार्ययोजना तैयार की जाएगी ताकि विभाग और शिक्षकों के बीच कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके।


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