लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की डेटा निगरानी को मजबूत करने के लिए राज्य परियोजना निदेशालय, समग्र शिक्षा ने एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना के अंतर्गत 'चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम' और 'UDISE+' (MIS) के सफल संचालन हेतु कुल ₹690.58 लाख की धनराशि जिलों को जारी करने का आदेश दिया है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल छात्रों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित करना है, बल्कि स्कूलों से बाहर हो रहे बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या पर भी लगाम लगाना है।
प्रमुख घोषणाएं और बजटीय प्रावधान
राज्य परियोजना निदेशक की ओर से जारी आदेश के अनुसार, बजट को दो मुख्य मदों में विभाजित किया गया है:
- चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (Child Tracking System): इसके लिए ₹3 प्रति छात्र की दर से ₹414.34 लाख आवंटित किए गए हैं।
- MIS (UDISE+) कार्य: इसके लिए ₹2 प्रति छात्र की दर से ₹276.23 लाख जारी किए गए हैं।
छात्रों को मिलेगी 'APAAR ID' और डिजिटल पहचान
विभाग अब 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी' की तर्ज पर प्रत्येक छात्र के लिए APAAR ID (Automated Permanent Academic Account Registry) जेनरेट कर रहा है।
- यू-डायस (UDISE+) पोर्टल पर छात्रों की 40 अलग-अलग श्रेणियों (Fields) में जानकारी एकत्र की जा रही है, जिसमें आधार, नाम, जन्मतिथि के साथ-साथ लंबाई, वजन और ब्लड ग्रुप जैसी जानकारियां भी शामिल हैं।
- यह एक Unique Verifiable Credential के रूप में कार्य करेगा, जो छात्र की पूरी शैक्षणिक यात्रा को ट्रैक करने में मदद करेगा।
स्कूल छोड़ चुके बच्चों की होगी वापसी
आदेश में परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करें। साथ ही:
- जो छात्र विद्यालय में अनुपस्थित रहते हैं, उनके अभिभावकों से SMS या कॉल के जरिए संपर्क किया जाए।
- कक्षा 5 और कक्षा 8 के बाद विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों के घरों पर भ्रमण (Home Visit) कर उन्हें दोबारा मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाए।
- इस काम में होने वाले स्टेशनरी, फोटोकॉपी और इंटरनेट रिचार्ज का खर्च इसी बजट से वहन किया जाएगा।
क्रियान्वयन के लिए सख्त निर्देश
शासन ने स्पष्ट किया है कि धनराशि का उपयोग केवल निर्धारित मदों में ही किया जाएगा और किसी भी प्रकार का विचलन अमान्य होगा।
- जिलों को निर्देश दिया गया है कि आवंटित धनराशि 3 दिनों के भीतर विद्यालयों की प्रबंध समिति (SMC) के खातों में हस्तांतरित की जाए।
- पूरे खर्च का भुगतान PFMS पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से किया जाएगा।
- डेटा एंट्री के दौरान किसी भी प्रकार की त्रुटि न हो, इसके लिए कंप्यूटर ऑपरेटर और MIS इंचार्ज को जवाबदेह बनाया गया है।








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