लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश की भाजपा सरकार और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रदेश में बीएलओ (Booth Level Officers) की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों पर न केवल काम का अत्यधिक बोझ है, बल्कि उन पर 'गलत काम' करने का मानसिक दबाव भी बनाया जा रहा है। अखिलेश यादव के अनुसार, प्रदेश के बीएलओ इस समय चौबीसों घंटे के भारी तनाव और अधिकारियों की संवेदनहीनता के बीच काम करने को मजबूर हैं।
सपा प्रमुख ने चुनावी प्रक्रिया में धांधली की आशंका जताते हुए आरोप लगाया कि पहले बीएलओ पर फॉर्म-7 के माध्यम से सही और वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटवाने का अनैतिक दबाव बनाया गया था। अब वही दबाव फॉर्म-6 के जरिए फर्जी नाम जोड़ने के लिए डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकतर बीएलओ ईमानदार हैं और उनका मन इस तरह के फर्जीवाड़े की गवाही नहीं देता है, जिसके कारण वे गहरे मानसिक अवसाद और हताशा में चले जाते हैं। इसी मानसिक प्रताड़ना का परिणाम है कि कर्मचारी आत्महत्या जैसा प्राणघातक कदम उठाने को विवश हो रहे हैं।
इस संदर्भ में अखिलेश यादव ने फतेहपुर जिले के बिंदकी क्षेत्र के ग्राम अलियाबाद की एक हृदय विदारक घटना का जिक्र किया। वहां प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षामित्र और बीएलओ अखिलेश कुमार सविता ने शनिवार शाम स्कूल के कमरे में ही फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मृतक ने अपने सुसाइड नोट का शीर्षक 'एसआईआर-2026 जीवनमुक्ति' दिया था, जिससे स्पष्ट होता है कि वे एसआईआर के अत्यधिक दबाव में थे। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि मात्र दस दिन बाद उनकी बेटी की शादी तय थी, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें छुट्टी देने से साफ इनकार कर दिया था।
अखिलेश यादव ने इस घटना को भाजपा सरकार की क्रूरता का प्रमाण बताते हुए कहा कि सत्ता ने अधिकारियों को पूरी तरह हृदयहीन और संवेदनहीन बना दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बेटी की शादी की भावनात्मक अहमियत और जिम्मेदारी वही समझ सकता है जिसके पास अपना परिवार हो। उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा को इस 'महापाप' का फल भुगतना पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने सभी बीएलओ और सरकारी कर्मचारियों से मार्मिक अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में निराश न हों और आत्मघाती कदम न उठाएं, क्योंकि उनका जीवन उनके परिवार के लिए अत्यंत अनमोल है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इतिहास में ऐसी निरंकुश सत्ताओं का पतन हमेशा हुआ है।


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