लखनऊ/प्रयागराज: उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती मामले में आज की अदालती कार्यवाही काफी गहमागहमी भरी रही। सोशल मीडिया और अपडेटमार्ट्स के माध्यम से साझा की गई जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दौरान रिक्त पदों या दावों की संख्या '32,000' बताए जाने पर कोर्ट में स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।
सुनवाई के मुख्य अंश:
1. 32 हजार की संख्या से बिगड़ी स्थिति:
सुनवाई के दौरान जैसे ही 32 हजार की संख्या का जिक्र आया, याचिकाकर्ता पक्ष में खलबली मच गई। टीम लीडर मनोज मौर्या के अनुसार, "एक समय ऐसा आया जब स्थिति हमारे हाथ से निकलती दिख रही थी और हम असहाय महसूस कर रहे थे, लेकिन अंततः स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया।"
2. जज साहब ने नोट किया क्राइटेरिया:
कोर्ट ने मामले से जुड़े विभिन्न क्राइटेरिया और तथ्यों को नोट कर लिया है। मनोज मौर्या ने बताया कि कोर्ट के भीतर क्या तय हुआ है, इसकी पूरी स्पष्टता अब विस्तृत आदेश (Order) आने के बाद ही होगी। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई है कि फैसला अभ्यर्थियों के पक्ष में सुखद रहेगा।
3. अगली सुनवाई की तिथि:
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 अप्रैल का दिन निर्धारित किया है। सुनवाई दोपहर 2 बजे शुरू होगी।
फीस और चंदे को लेकर स्पष्टीकरण
मनोज मौर्या टीम की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि आज वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह सर अपने अन्य केस (वेदांता केस, उड़ीसा) के सिलसिले में बाहर थे, इसलिए आज की डेट की फीस नहीं लगी है। टीम ने स्पष्ट किया है कि 22 अप्रैल की सुनवाई के लिए बेरोजगार साथियों से विकास सिंह सर की फीस के नाम पर कोई नया चंदा नहीं लिया जाएगा, क्योंकि पिछली फीस को ही अगली तारीख में एडजस्ट किया जाएगा।
विरोधियों पर निशाना और भावी रणनीति
आर्टिकल में गूगल फॉर्म के जरिए संख्या बढ़ाए जाने की साजिश का भी जिक्र किया गया है। मनोज मौर्या ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की साजिश रची गई, जिसका पर्दाफाश जल्द किया जाएगा। उन्होंने साथियों से धैर्य बनाए रखने की अपील की और कहा कि विकास सिंह सर के वापस आते ही अगली रणनीति तैयार कर मजबूती से लड़ाई लड़ी जाएगी।
निष्कर्ष:
72,825 भर्ती के अभ्यर्थियों के लिए 22 अप्रैल की तारीख बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। संघर्षरत टीम का कहना है कि "संघर्ष जारी है, हम लड़ेंगे और अंत में जीत हमारी ही होगी।"


Social Plugin