प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति का मामला एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर है। इस विवाद से जुड़े पीड़ित आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर कल, 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी तय है।
सुनवाई की मुख्य बातें
यह महत्वपूर्ण सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ में होगी। पिछले 18 महीनों से सर्वोच्च न्यायालय में लंबित इस मामले को लेकर अभ्यर्थियों में न्याय की उम्मीद जागी है।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग: 'याची लाभ'
पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों और पीड़ित अभ्यर्थियों ने हाल ही में मुख्यमंत्री कार्यालय में मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- सरकारी प्रस्ताव: सरकार 19 मार्च की सुनवाई के दौरान कोर्ट में 'याची लाभ' (Interim relief for petitioners) देने का ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत करे।
- पुराना संघर्ष: अभ्यर्थी वर्ष 2020 से ही हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट में न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
- हाई कोर्ट का पिछला आदेश: 13 अगस्त 2024 को हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मौजूदा भर्ती सूची को रद्द कर आरक्षण नियमावली के अनुसार नई सूची बनाने का निर्देश दिया था, जिसका अनुपालन अब तक प्रतीक्षित है।
देरी से बढ़ रहा है आर्थिक और सामाजिक दबाव
मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी न होने के कारण यह मामला लंबा खिंचता जा रहा है। लंबे समय से नियुक्ति की राह देख रहे अभ्यर्थियों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है। संगठन का मानना है कि यदि सरकार कल की सुनवाई में सकारात्मक रुख अपनाते हुए 'याची लाभ' का प्रस्ताव देती है, तो वर्षों से चला आ रहा यह विवाद समाप्त हो सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: 69,000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पिछले कई वर्षों से कानूनी दांव-पेच और आरक्षण विवादों के कारण सुर्खियों में बनी हुई है, जिससे हजारों योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटका है।


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