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उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र मामला: 1999 से अब तक के उतार-चढ़ाव का पूरा सफर

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार और साक्षरता दर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'शिक्षामित्र योजना' एक मील का पत्थर साबित हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए इस योजना की परिकल्पना की गई थी।

UP Shikshamitra Scheme Full History

यूपी की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में 'शिक्षामित्र' एक ऐसा नाम है, जो पिछले दो दशकों से अधिक समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। साल 1999 में एक वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था के रूप में शुरू हुआ यह सफर आज एक बड़े कानूनी और सामाजिक संघर्ष की कहानी बन चुका है। आइए, सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि कब क्या हुआ।

​1. शिक्षामित्र योजना की शुरुआत और शुरुआती मानदेय

​शिक्षामित्र योजना की नींव 26 मई 1999 को रखी गई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी को दूर करना था।

    • प्रारंभिक मानदेय: शुरुआत में शिक्षामित्रों को मात्र 1,450 रुपये प्रति माह पर नियुक्त किया गया था।
    • मानदेय में वृद्धि (2000-2007): समय के साथ इसमें धीरे-धीरे बढ़ोतरी हुई। साल 2000-2001 में इसे बढ़ाकर 2,250 रुपये, अक्टूबर 2005 में 2,400 रुपये और 15 जून 2007 को इसे 3,000 रुपये किया गया।

​2. प्रशिक्षण और समायोजन का दौर (2011-2015)

​साल 2011 से शिक्षामित्रों के भविष्य में एक बड़ा मोड़ आया, जब उन्हें नियमित शिक्षक बनाने की कवायद शुरू हुई।

    • प्रशिक्षण: 11 जुलाई 2011 को शिक्षामित्रों के लिए दो वर्षीय प्रशिक्षण का आदेश जारी हुआ।
    • कैबिनेट का फैसला: 23 जुलाई 2012 को उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने शिक्षामित्रों के समायोजन (नियमितीकरण) का निर्णय लिया।
    • समायोजन प्रक्रिया: 19 जून 2014 को पहले बैच के 60,442 शिक्षामित्रों और 8 अप्रैल 2015 को दूसरे बैच के 77,075 शिक्षामित्रों के समायोजन की प्रक्रिया शुरू हुई।
    • वेतन में उछाल: सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित होने के बाद शिक्षामित्रों का वेतन 35,000 से 40,000 रुपये तक पहुँच गया था।

​3. कानूनी पेच और ऐतिहासिक मोड़

​शिक्षामित्रों की खुशी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी और मामला अदालतों में पहुँच गया।

    • इलाहाबाद हाईकोर्ट का झटका: 12 सितंबर 2015 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन को निरस्त कर दिया।
    • सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: हालांकि, 7 दिसंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिससे कुछ समय के लिए राहत मिली।
    • अंतिम फैसला (2017): 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाते हुए शिक्षामित्रों के समायोजन को पूरी तरह निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET) पास किए नियमितीकरण संभव नहीं है।

​​4. वर्तमान मानदेय का ढांचा

​समायोजन रद्द होने के बाद शिक्षामित्रों को वापस उनके पुराने पद पर भेज दिया गया।

    • मानदेय वृद्धि: 1 अगस्त 2017 को सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय 3,500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया।

5. ताजा खबर: मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि (फरवरी 2026)

​लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों और मानदेय बढ़ाने की मांग के बाद, योगी सरकार ने फरवरी 2026 में एक ऐतिहासिक घोषणा की है:

    • मानदेय में 80% की वृद्धि: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बजट सत्र के दौरान घोषणा की कि शिक्षामित्रों का मानदेय 10,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया गया है।
    • कब से होगा लागू: यह बढ़ी हुई राशि 1 अप्रैल 2026 से शिक्षामित्रों के खातों में आनी शुरू हो जाएगी।
    • अतिरिक्त लाभ: मानदेय वृद्धि के साथ-साथ सरकार ने शिक्षामित्रों और उनके परिवारों के लिए 5 लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज (स्वास्थ्य बीमा) की सुविधा देने का भी ऐलान किया है।
    • अनुदेशकों को भी राहत: इसी क्रम में अनुदेशकों का मानदेय भी 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये कर दिया गया है।
विशेष टिप्पणी: 2017 के बाद यह पहली बार है जब शिक्षामित्रों के मानदेय में इतनी बड़ी (8,000 रुपये की एकमुश्त) वृद्धि की गई है। हालांकि शिक्षामित्र अभी भी पूर्ण 'नियमितीकरण' और 'समान कार्य-समान वेतन' की मांग कर रहे हैं, लेकिन 18,000 रुपये का यह फैसला उन्हें वर्तमान आर्थिक दौर में बड़ी राहत प्रदान करेगा। 

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