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फर्जीवाड़े की 'मास्टरक्लास': 10 शिक्षकों से होगी ₹2.69 करोड़ की भारी वसूली, प्रशासन ने कसा शिकंजा

Sir Ji Ki Pathshala

अंबेडकरनगर: उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग के भीतर सेंधमारी कर फर्जी दस्तावेजों के दम पर 'गुरुजी' बने जालसाजों की अब खैर नहीं है। अंबेडकरनगर में कूटरचित दस्तावेजों और नियम विरुद्ध नियुक्तियों के जरिए सिस्टम को चूना लगाने वाले 18 शिक्षकों को बर्खास्त करने के बाद, अब प्रशासन ने उनके द्वारा लिए गए वेतन की पाई-पाई वसूलने की तैयारी कर ली है।

UP Teacher Scam: 10 शिक्षकों की नौकरी भी गई और अब भरेंगे ₹2.69 करोड़ का जुर्माना।
विभाग ने कुल 10 दागी शिक्षकों को भुगतान किए गए 2 करोड़ 68 लाख 81 हजार 372 रुपये की वसूली के लिए प्रशासन को फाइल भेज दी है। यह वसूली भू-राजस्व (Land Revenue) की तर्ज पर की जाएगी, यानी सरकार अब सख्ती से इनकी संपत्तियों से पैसा वसूल सकती है।

फर्जीवाड़े का पूरा गणित: किसने कितनी लगाई चपत?

​जांच में सामने आया है कि इन शिक्षकों ने बीएड के फर्जी अंकपत्र, संपूर्णानंद विश्वविद्यालय की जाली डिग्रियां और दूसरों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सहारा लेकर 2009 से 2020 के बीच नौकरियां हथियाई थीं।

वसूली की सूची में शामिल प्रमुख नाम:

    • अरुण कुमार: सबसे बड़ी वसूली ₹62.55 लाख
    • शारदा सिंह, सुमन त्रिपाठी और नुजहत बेगम: प्रत्येक से ₹36.79 लाख की वसूली।
    • दीपक कुमार (संतकबीरनगर): दूसरे के अभिलेख पर नौकरी करने के लिए ₹36.15 लाख का हर्जाना।
    • अन्य शिक्षक: कृष्ण कुमार द्विवेदी (₹9 लाख+), मुन्नीलाल चौधरी (₹4.27 लाख), और सुरेश कुमार, मंदराम व ग्राम तिलक जैसे नाम भी सूची में शामिल हैं।

ब्याज समेत होगी वसूली, डीएम ने भेजी चिट्ठी

​अंबेडकरनगर के जिलाधिकारी अनुपम शुक्ल ने कड़ा रुख अपनाते हुए आजमगढ़ और संतकबीरनगर के जिलाधिकारियों को भी इस बाबत पत्र लिखा है, क्योंकि कुछ शिक्षक इन्हीं जिलों के निवासी हैं।

​"​​​बर्खास्त शिक्षकों को पहले ही नोटिस दिया गया था। अब विभाग ब्याज समेत वेतन की रिकवरी के लिए भू-राजस्व की प्रक्रिया अपना रहा है। किसी भी सूरत में सरकारी धन का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं होगा।"

— शैलेश पटेल, बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA)

सिस्टम में हड़कंप

​इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। भिटी, टांडा, आलापुर, अकबरपुर और जलालपुर के एडीएम को वसूली के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्रशासन का यह कदम उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी तंत्र को धोखा देने की कोशिश करते हैं।

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