प्रयागराज: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने अपनी साख को एक नए ऊंचे मुकाम पर पहुँचा दिया है। बोर्ड ने अब ऐसी मार्कशीट तैयार की है जिसे नष्ट करना लगभग नामुमकिन है। यह कदम न केवल प्रमाणपत्रों की उम्र बढ़ाएगा, बल्कि फर्जीवाड़े (Fake Marksheet) के काले धंधे पर भी हमेशा के लिए ताला जड़ देगा।
न फटेगी, न गलेगी: एक बार मिलेगी, उम्र भर चलेगी
2025 के सत्र से लागू होने वाली यह नई मार्कशीट किसी जादुई कागज से कम नहीं है। इसकी मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने इसे हाथ से फाड़ने वाले को 1 लाख रुपये का इनाम देने की चुनौती दी, जिसे कोई भी पार नहीं कर सका।
इसकी प्रमुख विशेषताएं इसे आम कागजों से अलग बनाती हैं:
- अजेय मजबूती: विशेष सिंथेटिक सामग्री से बनी इस मार्कशीट को हाथों से फाड़ना असंभव है।
- वॉटरप्रूफ कोटिंग: पानी में गिरने या साबुन से धोने पर भी न तो स्याही फैलेगी और न ही कागज गलेगा।
- लैमिनेशन से आजादी: अब छात्रों को इसे सुरक्षित रखने के लिए बाजार में लैमिनेशन कराने की जरूरत नहीं है।
- बेमिसाल उम्र: यह शीट 70 से 80 साल तक सुरक्षित रहेगी—यानी आपकी कामयाबी का सबूत आपके साथ जीवन भर रहेगा।
'धूप' बताएगी असली-नकली का फर्क
इस मार्कशीट में सुरक्षा की ऐसी लेयर्स (Layers) डाली गई हैं जो इसे दुनिया के बेहतरीन सुरक्षा मानकों के बराबर खड़ा करती हैं। सबसे खास फीचर इसका UV-सेंसिटिव लोगो है।
जैसे ही मार्कशीट को 1 मिनट के लिए धूप या अल्ट्रावॉयलेट रोशनी में रखा जाता है, उस पर माध्यमिक शिक्षा परिषद का लाल रंग का लोगो चमकने लगता है। बिना धूप के यह लोगो छिपा रहता है, जिससे जालसाजों के लिए इसकी हूबहू नकल तैयार करना नामुमकिन हो गया है।
सुरक्षा के नए मानक
इस आधुनिक मार्कशीट के जरिए यूपी बोर्ड ने देशभर की यूनिवर्सिटीज के सामने एक मिसाल पेश की है। हाई-सिक्योरिटी कोड्स और विशेष प्रिंटिंग तकनीक के इस्तेमाल से अब यूपी बोर्ड का सर्टिफिकेट दुनिया के किसी भी कोने में अपनी प्रमाणिकता खुद साबित करेगा।
बोर्ड का संदेश: "हम शिक्षा के स्तर के साथ-साथ उसकी विश्वसनीयता को भी विश्वस्तरीय बना रहे हैं। यह नई मार्कशीट छात्रों की मेहनत का वो दस्तावेज है, जो वक्त की मार से कभी नहीं धुंधलाएगा।"


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