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Prashast 2.0: अब शिक्षक पहचानेंगे बच्चों में 21 प्रकार की दिव्यांगता, 28 फरवरी तक डाउनलोड करने के निर्द

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज। समावेशी शिक्षा को धरातल पर उतारने और दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एनसीईआरटी (NCERT) ने 'प्रशस्ति 2.0' (Prashast 2.0) मोबाइल ऐप विकसित किया है। इस डिजिटल टूल की मदद से अब सरकारी स्कूलों के शिक्षक स्वयं बच्चों में 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की पहचान कर सकेंगे।

Prashast 2.0 App Registration Guide for UP Teachers

​स्कूल शिक्षा महानिदेशक ने उत्तर प्रदेश के सभी परिषदीय, सहायता प्राप्त और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) के लिए इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

प्रमुख बिंदुओं पर एक नजर

    • डेडलाइन: सभी शिक्षकों और स्पेशल एजुकेटर्स को 28 फरवरी तक ऐप डाउनलोड कर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी है।
    • अनिवार्यता: जिन शिक्षकों ने पुराना वर्जन डाउनलोड किया है, उन्हें उसे अनइंस्टॉल कर नया वर्जन (2.0) इंस्टॉल करना होगा।
    • 21 प्रकार की दिव्यांगता: ऐप के माध्यम से कुल 21 श्रेणियों की दिव्यांगता की स्क्रीनिंग की जाएगी।

कैसे काम करेगा प्रशस्ति ऐप?

​दिव्यांगता की पहचान की प्रक्रिया को दो महत्वपूर्ण भागों में विभाजित किया गया है:

  1. भाग-एक (शिक्षकों के लिए): कक्षा अध्यापक अपने स्तर पर बच्चों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग करेंगे और डेटा एंट्री करेंगे।
  2. भाग-दो (स्पेशल एजुकेटर्स के लिए): शिक्षकों द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर विशेष शिक्षक (Special Educators) डेटा की पुष्टि और गहन मूल्यांकन करेंगे।
नोट: शिक्षकों को बच्चों का लगभग दो सप्ताह तक विभिन्न परिस्थितियों (जैसे- व्यवहार, सामाजिक मेलजोल और चलने-फिरने की क्षमता) में बारीकी से अवलोकन करना होगा।

63 बिंदुओं पर आधारित होगी स्क्रीनिंग

​ऐप में एक चेकलिस्ट दी गई है जिसमें कुल 63 बिंदु शामिल हैं। प्रत्येक दिव्यांगता के प्रकार के लिए अलग-अलग प्रश्न और मानक तय किए गए हैं। इन विकल्पों को भरने के बाद ही ऐप संभावित दिव्यांगता की रिपोर्ट तैयार करेगा।

पंजीकरण की प्रक्रिया

​शिक्षक अपने आधार कार्ड या मोबाइल नंबर के जरिए ऐप पर स्वयं को पंजीकृत कर सकते हैं। इसके बाद उन्हें अपनी कक्षा का चयन कर बच्चों का विवरण भरना होगा।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य

​इस डिजिटल पहल का प्राथमिक लक्ष्य दिव्यांग बच्चों की पहचान में होने वाली देरी को समाप्त करना है। त्वरित स्क्रीनिंग के बाद बच्चों के मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने और उन्हें आवश्यक उपकरण व सहायता प्रदान करने के लिए 'प्रमाणन शिविरों' का आयोजन सुगम हो सकेगा।

📱 प्रशस्ति 2.0 ऐप: शिक्षकों के लिए स्टेप-बाय-स्टेप यूजर गाइड

एनसीईआरटी द्वारा विकसित यह ऐप दिव्यांग बच्चों की पहचान और उनके डेटा प्रबंधन को डिजिटल बनाने का एक महत्वपूर्ण टूल है। यहाँ इसका उपयोग करने की पूरी प्रक्रिया दी गई है:

चरण 1: डाउनलोड और इंस्टॉलेशन

    • अपने मोबाइल के Google Play Store पर जाकर 'PRASHAST' सर्च करें।
    • यदि आपने पुराना वर्जन पहले से डाउनलोड किया है, तो उसे Uninstall करें और नया वर्जन (2.0) इंस्टॉल करें।

चरण 2: पंजीकरण (Registration)

    • ऐप खोलें और 'New User? Register' पर क्लिक करें।
    • पंजीकरण के लिए आप अपने आधार कार्ड या मोबाइल नंबर का उपयोग कर सकते हैं।
    • अपनी व्यक्तिगत जानकारी भरें और अपना पद (जैसे: Teacher/Headmaster) चुनें।
    • विद्यालय का UDISE Code दर्ज कर अपने विद्यालय का चयन करें।

चरण 3: प्रोफाइल वेरिफिकेशन

    • पंजीकरण के बाद, आपकी प्रोफाइल को आपके विद्यालय के Headmaster (प्रधानाध्यापक) या संबंधित अथॉरिटी द्वारा ऐप के माध्यम से ही Approve किया जाएगा।
    • बिना अप्रूवल के आप बच्चों का डेटा नहीं भर पाएंगे।

चरण 4: बच्चों की स्क्रीनिंग (भाग-1)

    • लॉगिन करने के बाद 'Start Screening' बटन पर क्लिक करें।
    • अपनी कक्षा का चयन करें और बच्चे का बुनियादी विवरण (नाम, उम्र, लिंग, कक्षा रोल नंबर आदि) भरें।
    • अवलोकन अवधि: बच्चे का कम से कम 2 सप्ताह तक विद्यालय, खेल के मैदान और सामाजिक व्यवहार में बारीकी से अवलोकन करें।
    • चेकलिस्ट में दिए गए 63 बिंदुओं के आधार पर बच्चे के व्यवहार के अनुसार सही विकल्प का चयन करें।

चरण 5: डेटा सबमिट करना

    • सभी अनिवार्य फील्ड भरने के बाद डेटा को Submit करें।
    • आपके द्वारा भरी गई जानकारी अब संबंधित Special Educator (विशेष शिक्षक) के पास सत्यापन के लिए चली जाएगी।

💡 महत्वपूर्ण सुझाव

    • स्क्रीनिंग के दौरान किसी भी पूर्वाग्रह से बचें, केवल वही भरें जो आपने बच्चे में स्वयं देखा है।
    • 28 फरवरी तक पंजीकरण और प्रारंभिक स्क्रीनिंग का कार्य पूर्ण कर लें।
    • भाग-2 का कार्य स्पेशल एजुकेटर द्वारा किया जाएगा। शिक्षक केवल भाग-1 के लिए उत्तरदायी हैं।

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